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इस मंदिर में भगवान राम ने किया था पूर्वजों की शांति के पूजन, तब से गणेश मंदिर में लोग आते हैं अपने पितृदोष को दूर करने के लिए

दुनिया का एकमात्र मंदिर, जहां हाथी नहीं इंसान के चेहरे में हैं श्रीगणेश की मूर्ति

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 26, 2018, 07:39 PM IST

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रिलिजन डेस्क।भगवान गणेश के जितने भी मंदिर हैं सबने वो अपने गजमुख (हाथी के सिर) स्वरुप में हैं। दक्षिण भारत में आदि विनायक नाम का दुनिया का एक मात्र मंदिर है, जहां भगवान गणेश की मूर्ति का सिर इंसानों का है। अपनी इसी विशेषता के कारण ये मंदिर दुनिया के बाकी गणेश मंदिरों से अलग है। इसके साथ ही इसकी एक खूबी और है। ये ऐसा एक मात्र गणेश मंदिर भी है जहां लोग अपने पितरों की शांति कराने के लिए पूजन करने आते हैं। यहां की लोक मान्यता है कि इस जगह पर भगवान श्रीराम ने भी अपने पूर्वजों की शांति के लिए पूजा की थी। जिस परंपरा के चलते आज भी कई भक्त अपने पूर्वजों की शांति के लिए यहां पूजा करने आते हैं।

तमिलनाडु में मौजूद ये मंदिर भले ही बहुत भव्य ना हो लेकिन ये अपनी इस खूबी के लिए जाना जाता है। सामान्यतः पितृदोष के लिए नदियों के किनारे तर्पण की विधि की जाती है लेकिन इस मंदिर की खूबी के कारण इस जगह का नाम ही तिलतर्पणपुरी पड़ गया है। इस मंदिर के कारण यहां दूर-दूर से लोग अपने पितरों के निमित्त पूजन कराने आते हैं।

कहां और कौन सा है यह मंदिर-

तमिलनाडु के कुटनूर से लगभग 2 कि.मी. की दूरी पर तिलतर्पणपुरी नाम की एक जगह है, यहीं पर भगवान गणेश का यह आदि विनायक मंदिर है। इस मंदिर में मनुष्य मुखी गणेश होने के साथ-साथ एक और विशेषता है। यहां पर पूर्वजों की शांति के लिए पूजा करने का भी महत्व माना जाता है।

क्या होता है तिलतर्पण पुरी का अर्थ

इस जगह का नाम तिलतर्पण पुरी पड़ने के पीछे एक खास कारण है। तिलतर्पण पुरी शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, पहला- तिलतर्पण और दूसरा पुरी। तिलतर्पण का अर्थ होता है- पूर्वजों को समर्पित और पुरी का अर्थ होता है- शहर, यानि इस जगह का मतलब ही है पूर्वजों को समर्पित शहर।

मंदिर में मौजूद है भगवान शिव का भी मंदिर

इस जगह पर भगवान गणेश के नरमुखी रूप से साथ-साथ भगवान शिव का भी मंदिर है। मंदिर के बीच में भगवान शिव का मंदिर है और शिव मंदिर से बाहर निकलते ही भगवान गणेश का नरमुखी मंदिर देखा जा सकता है

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