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चाणक्य की 6 नीतियां- कब होती है दोस्त और जीवन साथी की परख

चाणक्य की नीतियों को अपनाने हम कई मुसीबतों से बच सकते हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 12, 2018, 04:29 PM IST

चाणक्य की 6 नीतियां- कब होती है दोस्त और जीवन साथी की परख

रिलिजन डेस्क।आचार्य चाणक्य द्वारा रचित चाणक्य नीति ग्रंथ में बताई गई नीतियों का पालन करने पर हम कई परेशानियों से बच सकते हैं। जीवन में हर कदम सफल होना चाहते हैं तो चाणक्य की ये नीतियां बहुत काम आती हैं। यहां जानिए चाणक्य नीति ग्रंथ के पहले अध्याय में बताई गई 6 ऐसी नीतियां, जिनमें सुखी और सफल जीवन से सूत्र छिपे हैं...

पहली नीति

बुद्धिहीन शिष्य को पढ़ाने से, बुरे स्वभाव वाली स्त्री का पालन करने से, अकारण दुखी रहने वाले व्यक्ति के साथ रहने से जीवन में परेशानियां बढ़ती हैं।

दूसरी नीति

बुरे स्वभाव वाली स्त्री, मूर्ख मित्र, उत्तर देने वाला नौकर और जिस घर में सांप रहते हैं, ये तीन साक्षात् मृत्यु के समान ही हैं।

तीसरी नीति

परेशानियों को दूर करने के लिए धन को बचाना चाहिए। धन से ज्यादा स्त्री की रक्षा करनी चाहिए। पुरुष को धन और स्त्री से भी ज्यादा खुद की रक्षा करनी चाहिए। अगर व्यक्ति खुद सुरक्षित रहेगा तो इन सभी की रक्षा कर सकता है।

चौथी नीति

जिस जगह पर मान-सम्मान न हो, पैसा कमाने के साधन न हों, रिश्तेदार या मित्र न हो, जहां ज्ञान बढ़ाने के स्रोत न हों, वहां निवास नहीं करना चाहिए।

पांचवीं नीति

काम में लगाने पर सेवक की, दुख आने पर रिश्तेदारों की, विपत्ति काल में मित्र की परख होती है। अगर किसी पुरुष का सबकुछ बर्बाद होने के बाद भी पत्नी साथ हो तो वह श्रेष्ठ जीवन साथी होती है।

छठी नीति
जो व्यक्ति निश्चित वस्तुओं को छोड़कर अनिश्चित वस्तुओं की ओर भागता है, उसकी निश्चित वस्तुओं का भी नाश हो जाता है।

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