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जब जुए में सब-कुछ हार रहे थे युधिष्ठिर, उस समय कहां थे भगवान श्रीकृष्ण?

पांडवों को वनवासियों के रूप में देखकर श्रीकृष्ण को बहुत क्रोध आया।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 08, 2018, 05:00 PM IST

  • जब जुए में सब-कुछ हार रहे थे युधिष्ठिर, उस समय कहां थे भगवान श्रीकृष्ण?

    रिलिजन डेस्क। महाभारत के अनुसार,जब हस्तिनापुर में युधिष्ठिर व शकुनि के बीच जुए का खेल चल रहा था,उस समय वहां श्रीकृष्ण नहीं थे। बाद में जब श्रीकृष्ण को पूरी बात का पता चला तो पांडवों से मिलने वन में आए। यहां पांडवों को वनवासियों के रूप में देखकर श्रीकृष्ण को बहुत क्रोध आया और उन्होंने ये भी बताया कि जब हस्तिनापुर में जुआ खेला जा रहा था तो वे वहां क्यों नहीं आ पाए। आज हम आपको यही बता रहे हैं।


    काम्यक वन में पांडवों से मिले श्रीकृष्ण
    जुएं में अपना राज-पाठ हार कर जब पांडव व द्रौपदी हस्तिनापुर से बाहर निकले तो कुछ दिन उन्होंने काम्यक वन में बिताए। यहां श्रीकृष्ण उनसे मिलने आए। पांडवों की ऐसी दुर्दशा देखकर श्रीकृष्ण को दुर्योधन पर बहुत क्रोध आया। द्रौपदी के अपमान की बात सुनकर श्रीकृष्ण ने कहा कि समय आने पर दुर्योधन सहित सभी कौरव नष्ट हो जाएंगे और युधिष्ठिर ही राजा बनेंगे और तुम उनकी पटरानी बनोगी। तब युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा कि जब हस्तिनापुर में जुएं का खेल हो रहा था,उस समय आप कहां थे?


    इसलिए हस्तिनापुर नहीं आ पाए श्रीकृष्ण
    युधिष्ठिर की बात सुनकर श्रीकृष्ण ने बताया कि- तुम्हारे द्वारा आयोजित राजसूय यज्ञ की समाप्ति पर जब मैंने शिशुपाल का वध कर दिया तब उसके बड़े भाई शाल्व ने क्रोधित होकर अपनी सेना सहित द्वारिका पर हमला कर दिया। मेरी अनुपस्थिति में उसने अनेक नगरवासियों का वध कर दिया। प्रद्युम्न और राजा शाल्व का भयंकर युद्ध हुआ। प्रद्युम्न से पराजित होकर राजा शाल्व द्वारिका से भाग गया। द्वारिका पहुंच कर जब मुझे सारी बात का ज्ञान हुआ तो शाल्व का वध करने के लिए मैं उसे ढूंढने लगा।


    श्रीकृष्ण ने किया राजा शाल्व का वध
    श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया कि- जब मैं राजा शाल्व को ढूंढ रहा था तो वह महासागर के एक द्वीप पर मुझे मिला। मुझे देखकर वह जोर-जोर से युद्ध के लिए ललकारने लगा। राजा शाल्व और मेरे बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया। राजा शाल्व के पास एक विशेष विमान था,जिस पर सवार होकर वह कभी अदृश्य हो जाता तो कभी पुन: प्रकट हो जाता। अंत में मैंने राजा शाल्व का वध कर दिया। श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि- यही कारण था कि जब हस्तिनापुर में जुआ खेला जा रहा था,मैं वहां नहीं आ सका।

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