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16 अप्रैल: सोमवती अमावस्या पर 17 साल बाद बन रहा है शुभ संयोग, फिर बनेगा 2028 में

सोमवार 16 अप्रैल 2018 को सोमवती अमावस्या है। इस साल सोमवती अमावस्या पर सूर्य-चंद्रमा एक राशि और एक ही नक्षत्र में रहेंगे

यूटिलिटी डेस्क | Last Modified - Apr 13, 2018, 01:25 PM IST

  • 16 अप्रैल: सोमवती अमावस्या पर 17 साल बाद बन रहा है शुभ संयोग, फिर बनेगा 2028 में

    सोमवार, 16 अप्रैल 2018 को सोमवती अमावस्या पड़ रही है। इस साल सोमवती अमावस्या पर सूर्य-चंद्रमा मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में रहेंगे। वैशाख मास और अश्विनी नक्षत्र का ये संयोग 17 साल बाद बन रहा है। इसके बाद ऐसा शुभ संयोग 10 साल बाद 24 अप्रैल 2028 को बनेगा। सात्विक और देवगण वाले इस नक्षत्र के साथ सोमवार और अमावस्या का संयोग बनने से ये दिन पितृ पूजा, पितृ दोष और कालसर्प दोष की शांति के लिए बहुत खास हो गया है।

    हिन्दू धर्म में इस अमावस्या को बहुत खास माना गया है। विवाहित स्त्रियां इस दिन अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत करती हैं। पुराणों में लिखा है इस दिन मौन (बिना किसी से बात किए) व्रत करने से सहस्र गोदान (हजारों गायों के दान) का फल मिलता है। बता दें कि सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है।

    पुराणों में बताया है इसका महत्व -

    - पुराणों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत नाम से भी बताया गया है। अश्वत्थ यानि पीपल का पेड़। इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के पेड़ की दूध, जल, फूल, चावल और चन्दन से पूजा की जाती है। फिर पेड़ के चारों ओर १०८ बार धागा लपेट कर परिक्रमा की जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का भी बहुत महत्व होता है।

    - महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य हर तरह से सुखी और स्वस्थ्य रहेगा। अमावस्या पितृओं की तिथि है इसलिए ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों को शांति मिलती है।

    - निर्णय सिंधु ग्रंथ के अनुसार इस दिन मौन रहकर स्नान, पूजा-पाठ, दान और व्रत करने से बड़े से बड़े पाप से मुक्ति मिल जाती है इसके साथ ही हजारों गायों के दान के जितना पुण्य फल मिलता है।

    - वैशाख महीने की इस अमावस्या पर 7 पवित्र नदीयों, गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु आैर कावेरी में से किसी भी एक नदी में नहाने से ही हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।

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