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दैत्यों के गुरु शु्क्राचार्य को महादेव और पार्वती ने क्यों माना अपना पुत्र?

एक बार भगवान शिव ने दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य को निगल लिया था।

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 20, 2018, 07:50 PM IST

  • दैत्यों के गुरु शु्क्राचार्य को महादेव और पार्वती ने क्यों माना अपना पुत्र?

    रिलिजन डेस्क। शिवपुराण की कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य को निगल लिया था और बाद में जब शुक्राचार्य शिवजी के शरीर से बाहर आए तो माता पार्वती ने अपना पुत्र माना था। भगवान शिव ने ऐसा क्यों किया, ये कथा इस प्रकार है...

    महादेव ने शुक्राचार्य को माना था अपना पुत्र

    शिवपुराण की रुद्रसंहिता के अनुसार, अंधक नाम का एक महापराक्रमी राक्षस था, वह जन्म से ही अंधा था। उसने ब्रह्माजी को प्रसन्न कर दिव्य नेत्र प्राप्त कर लिए और देवता, दानव, गंधर्व आदि किसी से भी पराजित न होने का वरदान ले लिया। अपनी शक्ति के अभिमान में अंधक ने महादेव पर आक्रमण कर दिया। तब सभी देवताओं ने मिलकर उससे युद्ध किया।
    इस युद्ध में हजारों दैत्य मारे गए। अंधक के कहने पर शुक्राचार्य उन्हें पुनर्जीवित कर दिया। जब यह बात शिवजी को पता चली तो उन्होंने शुक्राचार्य को निगल लिया। इससे अंधक की सेना कमजोर हो गई और अंत में देवताओं की विजय हुई। शुक्राचार्य को महादेव के पेट में सातों लोक, ब्रह्मा, नारायण, इंद्र आदि पूरी सृष्टि के दर्शन हुए। जब शुक्राचार्य बाहर नहीं निकल सके तो वे शिवजी के पेट में ही मंत्र जाप करने लगे।
    इस मंत्र के प्रभाव से शुक्राचार्य महादेव के शुक्र रूप में लिंग मार्ग से बाहर निकले। भगवान शिव ने उनसे कहा कि- चूंकि तुम मेरे लिंग मार्ग से शुक्र की तरह निकलो हो, इसलिए अब तुम मेरे पुत्र कहलाओगे। महादेव के मुख से ऐसी बात सुनकर शुक्राचार्य ने उनकी स्तुति की। माता पार्वती ने भी शुक्राचार्य को अपना पुत्र मानकर बहुत से वरदान दिए।

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