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मार्कंडेय पुराण: बिना नहाए और खड़े हाेकर खाना खाने से मनुष्य होने लगता है दरिद्र

पुराण संहिताओं और स्मृतिग्रंथों में भोजन से जुड़े महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 12, 2018, 04:35 PM IST

मार्कंडेय पुराण: बिना नहाए और खड़े हाेकर खाना खाने से मनुष्य होने लगता है दरिद्र

रिलीजन डेस्क। मार्कंडेय पुराण में लिखा है कि बिना नहाए और खड़े हाेकर खाना खाने से मनुष्य दरिद्र होने लगता है। इसके अलावा सुश्रुत संहिता के अनुसार गृहस्थ व्यक्ति को 32 ग्रास (बाइट) जितना ही भोजन करना चाहिए। इससे ज्यादा भोजन करने से व्यक्ति रोगी होने लगता है और धीरे-धीरे उम्र भी कम होने लगती है। वहीं पद्म, स्कंद, विष्णु और ब्रह्मवैवर्तपुराण के साथ अन्य संहिताओं और स्मृतिग्रंथों में भी भोजन से जुड़े महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं। जिनका ध्यान रखा जाए तो निरोगी रहेंगे, उम्र बढ़ेगी और घर में दरिद्रता भी नहीं आएगी। महाभारत में लिखा है कि भोजन से बुद्धि में सात्विक, राजसिक और तामसिक गुण आते हैं। इसलिए भोजन संबंधी नियमों को ध्यान में रखना चाहिए। जिससे बुद्धि और मन पवित्र रहेंगे और कोई गलत काम नहीं होगा।

पढ़ें भोजन से जुड़े कौन-से नियम ध्यान रखने चाहिए -
- अपने पांच अंगों को धोकर ही भोजन करना चाहिए। पांच अंग (2 हाथ, 2 पैर और मुंह)
- मनु और अत्रिस्मृति के अनुसार गीले पैर होकर भोजन करना चाहिए।
- पद्म पुराण के सृष्टि खंड में लिखा है कि भोजन करते समय पैर सुखे नहीं होने चाहिए और अंधेरे में भोजन नहीं करना चाहिए।
- महाभारत के अनुशासन और शांति पर्व में उल्लेख है कि मनुष्य को सिर्फ सुबह और शाम को ही भोजन करना चाहिए। इस नियम का पालन करने से उपवास का फल मिलता है। वहीं इसके अलावा पद्म पुराण के सृष्टि खंड में लिखा है कि मनुष्य के एक बार का भोजन देवताओं का भाग होता है। दूसरी बार का भोजन मनुष्यों का भाग होता है। तीसरी बार का भोजन प्रेत और दैत्यों का भाग होता है और चौथी बार का भोजन राक्षसों का भाग होता है।
- लघुहारित और वसिष्ठ स्मृति के अनुसार पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंहकर के भोजन करना चाहिए। जिससे मनुष्य का धन और आयु बढ़ती है। वहीं पद्म पुराण के सृष्टि खंड में लिखा है कि दक्षिण दिशा की ओर मुंहकर के भोजन करने से प्रेत शक्तियां उस भोजन काे खाती। पश्चिम दिशा की ओर मुंहकर के भोजन करने से मनुष्य रोगी होता और उसकी उम्र कम हो जाती है।

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