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गर्मी में घूमने के लिए बेस्ट जगहों में से एक है हिमालय की ये रहस्यमयी झील

गर्मी में यहां घूमने जाते हैं पर्यटक, रोमांच के लिए आप भी कर सकते हैं प्लान

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 04, 2018, 05:30 PM IST

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    ट्रैवल डेस्क।अगर रोमांच पसंद करते हैं तो आपके लिए उत्तराखंड की रूपकुंड झील बेस्ट डेस्टिनेशन हो सकता है। इस झील में नरकंकाल दिखाई देते हैं। इस कारण रूपकुंड झील को रहस्यमयी झील कहा जाता है। ठंड के दिनों में ये झील पूरी तरह जम जाती है और गर्मी में यहां की बर्फ पिघलने से झील में कंकाल दिखाई देने लगते हैं। इसे कंकाल झील भी कहते हैं। चारों ओर से ग्लेशियर और पहाड़ से घिरी ये झील ट्रैकिंग के लिए बहुत प्रसिद्ध है। हर साल गर्मी के दिनों में यहां हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। यहां जानिए रूपकुंड झील से जुड़ी खास बातें...

    बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं पर्यटक

    > हिमालय पर स्थित रूपकुंड झील के आसपास का प्राकृतिक वातावरण बहुत ही सुंदर दिखाई देता है। यहां गर्मी के दिनों में काफी पर्यटक आते हैं।

    > ये झील हिमालय की दो चोटियों के पास स्थित है। एक है त्रिशूल और दूसरी है नंदघुंगटी।

    > यहां हर साल पतझड़ में एक धार्मिक त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार में आसपास के गांवों के लोग शामिल होते हैं।

    > नंदा देवी का खास उत्सव बारह साल में एक बार मनाया जाता है।

    > रूपकुंड की यात्रा एक सुखद अनुभव देती है। पूरे रास्ते में चारों ओर पर्वत श्रृंखलाएं दिखती हैं।

    रूपकुंड से जुड़ी खास बातें

    > रूपकुंड झील हिमालय पर लगभग 5029 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। गर्मियों में ग्लेशियर पिघलने से ये झील बन जाती है।

    > इस झील में इतने सैकड़ों नरकंकाल कैसे आए, इस बारे में यहां कई कहानियां प्रचलित हैं।

    > पहले माना जाता था कि यहां किसी महामारी के कारण इतने सारे लोगों की मौत एक साथ हुई थी और बर्फीले तूफान में ये सभी शव यहां दब गए। बर्फ के कारण शव प्राकृतिक रूप से संरक्षित हो गए।

    > इसके बाद कुछ वैज्ञानिकों ने यहां से कंकालों के नमूने एकत्रित किए और कार्बन डेटिंग के जरिए ये संकेत दिया कि ये कंकाल 12वीं सदी से 15वीं सदी के बीच के हैं।

    स्थानीय मान्यता

    > रूपकुंड झील के बारे में यहां के लोग मानते हैं कि पुराने समय में यहां एक राजा था। वह राज अपनी प्रजा के साथ नंदा देवी की तीर्थ यात्रा पर निकला।

    > राजा ने इस तीर्थ यात्रा में कई गलतियां की, जिनकी वजह से नंदा देवी नाराज हो गईं और बर्फीला तूफान आ गया। जिससे राजा और उसकी प्रजा यहां मारे गए।

    > यहां चूड़ियां और गहने भी मिले थे, जिससे पता चला है कि समूह में महिलाएं भी शामिल थीं।

    कैसे पहुंचे रूपकुंड झील

    इस रहस्यमयी झीन तक पहुंचने के लिए आपको लोहाजंग पहुंचना होगा। ये जगह करन प्रयाग से करीब 85 किमी दूरी पर स्थित है। काठगोदाम रेल्वे स्टेशन से लोहाजंग पहुंचने के लिए प्राइवेट कार कर सकते हैं। अगर आप ऋषिकेश से आ रहे हैं तो वहां से करनप्रयाग तक के लिए बस मिल सकती है। करनप्रयाग से लोहाजंग तक पहुंचने में करीब 4-5 घंटे लगते हैं।

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