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दो दरवाजों के बीच में लगे या अटैच बाथरुम की दीवार से सटे बेड पर ना सोएं, 5 पुराण और 2 संहिताओं में लिखे हैं पलंग से जुड़े 7 नियम

स्कंद और ब्रह्मपुराण सहित 2 संहिता ग्रंथ और अन्य 3 पुराणों में पलंग की दिशा, जगह और उसकी लकड़ी के बारे में बताया गया है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 12, 2018, 04:34 PM IST

दो दरवाजों के बीच में लगे या अटैच बाथरुम की दीवार से सटे बेड पर ना सोएं, 5 पुराण और 2 संहिताओं में लिखे हैं पलंग से जुड़े 7 नियम
स्कंद और ब्रह्मपुराण सहित 2 संहिता ग्रंथ और अन्य 3 पुराणों में पलंग (शैय्या) संबंधी काम की बातें बताई गई हैं। जिनको अपनाने से बीमारियां नहीं होती और उम्र भी बढ़ती है। इसके साथ ही शैय्या दोष नहीं लगता जिससे तरक्की में रुकावटें नहीं आती। इनमें बताया गया है कि पलंग की सही दिशा और जगह क्या होनी चाहिए। किस लकड़ी का बेड नहीं होना चाहिए और बेड के आसपास कौन सी चीजों का होना शुभ रहता है। ग्रंथों में ये भी बताया है कि पलंग की गलत दिशा और स्थिति के कारण बीमारियां बढ़ती हैं। तनाव और अनजाना डर भी इसी कारण बना रहता है।
आगे पढ़ें आपके पलंग से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें -
1. लघुव्यास संहिता के अनुसार पलंग के सामने शीशा नहीं होना चाहिए। शीशे में बेड दिखाई देता है तो उस बेड पर सोने वालों की सेहत और रिलेशनशिप दोनों पर नेगेटिव असर पड़ता है। इस ग्रंथ के दूसरे अध्याय में शैय्या और दर्पण की इस स्थिति को अशुभ बताया गया है।
2. स्कंद और ब्रह्मपुराण में बताया गया है कि कैसी जगह नहीं सोना चाहिए। इन ग्रंथों के अनुसार पलंग के बराबर में खिड़की का होना शुभ रहता है। उठते ही आकाश का दर्शन हो सके इसलिए सुबह कुछ देर तक खिड़की खुली रहनी चाहिए। इससे आलस्य और थकान खत्म हो जाती है और सांस संबंधी बीमारियां भी नहीं होती।
3. विष्णु और वामन पुराण के अनुसार आपके पलंग का हेडर पूर्व या दक्षिण दिशा की तरफ होना चाहिए। इन दिशाओं में सिर रखकर सोने से पैसा और आयु बढ़ती है।
4. कूर्म पुराण के अनुसार बांस या पलाश की लकड़ी का पलंग नहीं होना चाहिए। इसके अलावा लोहा और अन्य अशुद्ध धातु का पलंग भी बीमारियां देने वाला होता है। इसके अलावा सागौन का पलंग इस्तमाल किया जा सकता है।
5. चरक संहिता के अनुसार पलंग समतल जगह पर होना चाहिए। उसका कोई भी हिस्सा टूटा नहीं होना चाहिए और आवाज करने वाला बेड भी अशुभ माना गया है।

6. आपका शैय्या स्थान यानी पलंग दो दरवाजों के बीच नहीं रखा होना चाहिए। ऐसा होने से इस पर सोने वाले की तबीयत बार-बार खराब होती है और उसे मानसिक अशांति का भी सामना करना पड़ सकता है।

7 . शयनकक्ष और स्नानगृह की स्थिति के बारे में ग्रंथों में लिखा है कि बाथरूम और बेडरूम को जोड़ने वाली दीवार से पलंग दूर होना चाहिए। ऐसा होने से मानसिक तनाव और डर बना रहता है। इससे बचने के लिए उस दीवार और पलंग के बीच लकड़ी का तख्ता लगाएं।

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