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14 जुलाई को बन रहा है शुभ योग, इस दिन करें शनि के उपाय, अशुभ प्रभाव से मिल सकता है छुटकारा

शनि पुष्य योग में कुछ आसान उपाय किए जाएं तो शनिदेव की कृपा बनी रहती है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 12, 2018, 06:55 AM IST

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रिलिजन डेस्क. इस बार 14 जुलाई, शनिवार को दिन भर पुष्य नक्षत्र रहेगा। शनिवार को पुष्य नक्षत्र होने से शनि पुष्य का शुभ योग बन रहा है। साथ ही इस दिन से आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र भी शुरू हो रहे हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ फल दे रहा है, वे यदि इस दिन कुछ आसान उपाय करें तो उन्हें फायदा हो सकता है। इस समय वृश्चिक, धनु और मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती और वृषभ व कन्या पर शनि की ढय्या का प्रभाव है। इस राशि के लोग शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए ये उपाय करें…
1. शनिवार को व्रत रखें और विधि-विधान से शनिदेव की पूजा करें।
2. शनि पुष्य पर जूते, काले कपड़े, अनाज व लोहे के बर्तन दान करें।
3. किसी भी विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के मंत्रों के 23000 जाप करें या करवाएं।
मंत्र- ऊँ ऐं ह्लीं श्रीशनैश्चराय नम:।
4. शनिदेव का अभिषेक सरसों के तेल से करें व 108 दीपकों से आरती करें।
5. शनि पुष्य पर तथा प्रत्येक शनिवार को सुबह स्नान आदि करने के बाद बड़ (बरगद) और पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक लगाएं और दूध एवं धूप आदि अर्पित करें।
6. शनि पुष्य पर चोकर युक्त आटे की दो रोटी लेकर एक पर तेल और दूसरी पर घी चुपड़ दें। घी वाली रोटी पर मिठाई रखकर काली गाय को खिला दें तथा दूसरी रोटी काले कुत्ते को खिला दें।

ज्योतिष में बताए गए हैं कुल 27 नक्षत्र
- ज्योतिष के अनुसार कुल सत्ताइस नक्षत्र बताए गए हैं जिसमें पुष्य आठवां होता है। इसे सभी नक्षत्रों का राजा माना जाता है।

- इसी कारण इस नक्षत्र में सोना, चांदी या अन्य सामान खरीदना शुभ माना जाता है।
क्यों है विशेष महत्व?
- पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं जो ज्ञान एवं विवेक के देने वाले माने जाते हैं वहीं इस नक्षत्र का दिशा प्रतिनिधि शनि देव करते हैं जिसे ‘स्थावर’ भी कहा जाता है।

- जिसका अर्थ होता स्थिरता देने वाला। इसीलिए ऐसा माना जाता है कि इस नक्षत्र में किए गए पुण्य कर्म कभी नष्ट नहीं होते। इसी कारण इस दिन दान या अच्छे कर्म करने का विशेष महत्व माना जाता है।

सफल होते हैं सभी काम
पाणिनी संहिता में पुष्य नक्षत्र को लेकर कहा गया है कि-
सिध्यतिं अस्मिन् सर्वाणि कार्याणि सिध्य:।
पुष्यति अस्मिन् सर्वाणि कार्याणि पुष्य।।

अर्थ -पुष्य नक्षत्र में शुरू किए गए काम सदैव अच्छा फल देने वाले होते हैं। इस समय किए कार्य हमेशा सिद्ध होते हैं।

- इसके अलावा ऋग्वेद में भी इसे मंगल कर्ता और सुख देने वाला कहा गया है।

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