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स्त्री हो या पुरुष सुबह उठते ही बोलें ये 1 मंत्र, दूर हो सकता है बुरे से बुरा समय

शास्त्रों में बताए गए उपाय करते रहने से हमारी सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 20, 2018, 01:00 PM IST

  • स्त्री हो या पुरुष सुबह उठते ही बोलें ये 1 मंत्र, दूर हो सकता है बुरे से बुरा समय, religion hindi news, rashifal news

    रिलिजन डेस्क।रोज सुबह उठते ही कोई शुभ काम कर लिया जाए तो पूरा दिन शुभ बन सकता है। दिनभर सकारात्मक फल मिल सकते हैं। अधिकतर लोग सुबह उठते ही अपनी दोनों हथेलियां देखते हैं। कुछ लोग देवी-देवताओं के मंत्रो का जाप करते हैं। इन उपायों के साथ ही सुबह बिस्तर छोड़ने से पहले यहां बताया जा रहा मंत्र भी बोलेंगे तो सभी देवी-देवताओं और नौ ग्रहों की कृपा मिल सकती है। अगर आप यहां बताया जा रहा मंत्र नहीं बोल सकते हैं तो इस मंत्र के हिन्दी अर्थ का पाठ भी कर सकते हैं।

    वामन पुराण में बताया है ये मंत्र

    वामन पुराण के चतुर्दशोध्याय यानी 14वें अध्याय के 21 से 25वें श्लोक में स्वयं महादेव ने एक स्तुति का वर्णन किया है। ये स्तुति शुभ फल देने वाली, बुरे समय को दूर करने वाली, लाभ प्रदान करने वाली और भाग्य चमकाने वाली है। शिवजी के अनुसार जो भी भक्त सुबह उठते ही इस मंत्र स्तुति का पाठ करता है, उसका बुरे से बुरे समय खत्म हो सकता है।

    मंत्र स्तुति-

    ब्रह्मा मुरारिरित्रपुरान्कारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।

    गुरुश्च शुक्र: सह भानुजेन कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।

    भृगुर्वसिष्ठ: क्रतुरडिराश्च मनु: पुलस्त्य: पुलद्ध: सगौतम: ।

    रैभ्यो मरीचिश्चयवनो ऋभुश्च कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।

    सनत्कुमार: सनक: सनन्दन: सनातनोप्यासुरिपिडलौ च।

    सप्त स्वरा: सप्त रसातलाश्र्च कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।

    ये है इस मंत्र का अर्थ

    ब्रह्मा, विष्णु, शिव ये देवता तथा सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि ये सभी ग्रह मेरी सुबह और दिन को मंगलमय बनाएं। भृगु, वसिष्ठ, क्रतु, अडिग्रा, मनु, पुलस्त्य, पुलह, गौतम, रैभ्य, मरीच, च्यवन और ऋभु- ये सभी ऋषि मेरी सुबह और दिन को मंगलमय बनाएं। सनत्कुमार, सनक, सन्नदन, सनातन, आसुरि, पिडग्ल, सातों स्वर और सातों रसातल- ये सभी मेरी सुबह और दिन को मंगलमय बनाएं।

    आप चाहें तो सिर्फ इन 2 लाइन्स का जाप भी कर सकते हैं-

    ब्रह्मा मुरारिरित्रपुरान्कारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।

    गुरुश्च शुक्र: सह भानुजेन कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।

    अर्थ- ब्रह्मा, विष्णु, शिव ये देवता तथा सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि ये सभी ग्रह मेरी सुबह और दिन को मंगलमय बनाएं।

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