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मदर्स डे: देवमाता अदिति का अवतार थीं कौशल्या, महान हैं ग्रंथों की 5 माताएं

मदर्स डे के मौके पर हम आपको कुछ ऐसी माताओं के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने अपने पुत्रों को श्रेष्ठ शिक्षा प्रदान की।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - May 12, 2018, 05:00 PM IST

  • मदर्स डे: देवमाता अदिति का अवतार थीं कौशल्या, महान हैं ग्रंथों की  5 माताएं

    रिलिजन डेस्क। शिशु की प्रथम गुरु माता ही होती है। माता की महानता से प्रेरित अनेक प्रसंग हमारे ग्रंथों में मिलते हैं। मदर्स डे (13 मई, रविवार) के मौके पर हम आपको धर्म ग्रंथों की कुछ ऐसी माताओं के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने अपने पुत्रों को श्रेष्ठ शिक्षा प्रदान की, जिससे कि वे समाज में एक आदर्श के रूप में पहचाने जाते हैं।

    कौशल्या
    भगवान श्रीराम की माता कौशल्या रामायण की एक प्रमुख पात्र हैं। ग्रंथों के अनुसार वे कौशल प्रदेश (छत्तीसगढ़) की राजकुमारी थीं। ग्रंथों में देवमाता अदिति के कौशल्या के रूप में अवतार लेने का वर्णन भी मिलता है। उन्होंने श्रीराम को शिक्षा देकर मर्यादा पुरुषोत्तम बनाया।

    सीता
    सीता मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की पत्नी व लव-कुश की माता थीं। ग्रंथों में इन्हें साक्षात देवी लक्ष्मी का अवतार बताया गया है। आश्रम में रहते हुए भी सीता ने लव-कुश को श्रेष्ठ शिक्षा दी और उन्हें पराक्रमी बनाया।

    यशोदा
    भगवान श्रीकृष्ण को जन्म भले ही देवकी ने दिया है, लेकिन उनकी माता के रूप में सबसे पहले यशोदा को ही याद किया जाता है। यशोदा ने ही बालपन में श्रीकृष्ण को नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया।

    कुंती
    कुंती की मूल नाम पृथा था। ये महाराज शूरसेन की बेटी और वसुदेव की बहन थीं। कुंती का विवाह चंद्रवंशी राजा पांडु से हुआ था। कौरव पांडवों के साथ भेदभाव करते थे, इसके बाद भी कुंती ने सदैव अपने पुत्रों को सत्य की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया।

    शकुंतला
    शकुंतला ब्रह्मर्षि विश्वामित्र व अप्सरा मेनका की पुत्री थीं। इनका विवाह चक्रवर्ती राजा दुष्यंत से हुआ था। शकुंतला के पुत्र का नाम भरत था। भरत के ही नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा। भरत के ही नाम पर भरतवंश की नींव पड़ी। इसी वंश में आगे जाकर शांतनु, पांडु, धृतराष्ट्र व युधिष्ठिर आदि राजा हुए।

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