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इलाज के लिए पीठ पर थाली टिकाकर मंत्रों के साथ मारते हैं मिट्टी, काले जादू के लिए बदनाम है ये गांव

आधुनिक भारत में अभी भी कुछ जगहें ऐसी हैं जहां जादू-टोने के डर से लोग जाने से घबराते हैं।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 19, 2018, 07:26 PM IST

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    पीठ पर टिकी थाली पर मंत्रों के साथ मारते हैं मिट्टी और करते हैं बीमारियों का इलाज।

    रिलिजन डेस्क। आधुनिक भारत में अभी भी कुछ जगहें ऐसी हैं जहां जादू-टोने के डर से लोग जाने से घबराते हैं। पश्चिम बंगाल और असम के कुछ इलाके ऐसे हैं जो अभी भी इन्हीं बातों के लिए जाने जाते हैं। असम का एक गांव मायोंग ऐसी ही जगहों में से एक है। इस गांव में आज भी काले जादू का इतना खौफ है कि बाहरी लोग यहां जाने से डरते हैं। हालांकि अब यहां काला जादू किसी को परेशान करने के लिए नहीं किया जाता। लोग यहां अब इसका उपयोग सिर्फ बीमारियों को दूर करने के लिए करते हैं। यहां बीमार इंसान की पीठ पर थाली टिका कर मंत्र उच्चारण के साथ मिट्टी मारी जाती है, कहा जाता है ये यहां बीमारियों को दूर करने का पारंपरिक तरीका है।

    इसे काले जादू का गढ़ माना जाता है। यहां के हर घर में आज भी जादू किया जाता है। मान्यता है कि पूरे विश्व में काले जादू की शुरुआत इसी जगह से हुई है। असम का ये छोटा सा गांव मायोंग गुवाहाटी से लगभग 40 कि.मी. दूर है। इस गांव का इतिहास महाभारत से जुड़ा है। माना जाता है ये गांव भीम के बेटे घटोत्कच का है। उसे यहां का राजा माना जाता है। मायोंग शब्द ही संस्कृत के माया से बना है। हालांकि इस गांव के आसपास वाइल्ड लाइफ सेंचुरी भी है, जहां लोग सफारी करने आते हैं लेकिन इस गांव का खौफ इतना है कि लोग इसमें जाने से कतराते हैं। ये गांव तंत्र साधना के केंद्र मां कामाख्या मंदिर से महज 40-50 किमी की दूरी पर है।

    बौद्ध और हिंदू साथ करते थे तंत्र

    यहां दो कुंड है एक अष्टदल कुंड व दूसरा योनि कुंड। योनि कुंड पर हिंदू व अष्टदल कुंड पर बौद्ध अपनी तंत्र विद्या को सिद्ध करने के लिए साधना किया करते थे। यहां के संग्रहालय में 12वीं शताब्दी की कई पांडुलिपियां मौजूद हैं। ये तंत्र के वे कीमती दस्तावेज हैं जिनका मूल्य केवल इस भाषा को समझने वाले ही बता सकते हैं। एक जानकार के अनुसार इन लिपियों में उड़ने के लिए, किसी को मारने के लिए व वश में करने के लिए काला जादू किस तरह किया जाए ये सारी जानकारियां मौजूद हैं।

    बूढ़े मायोंग से किया जाता है काला जादू

    मायोंग में बूढ़े मायोंग नाम की एक जगह है जिसे काले जादू का केंद्र माना जाता है। यहां पर भगवान शिव व पार्वती के अलावा गणेशजी भी की तांत्रिक प्रतिमा है। जिसके सामने प्राचीन समय मे नर बलि दी जाती थी। इसके अलावा यहां योनि कुंड भी है जिसके आसपास कई मंत्र लिखे हैं। इसी जगह पर सबसे अधिक काले जादू के प्रयोग किए गए। स्थानीय लोग मानते हैं कि काले जादू की मंत्र शक्ति के कारण ये कुंड हमेशा पानी से लबालब रहता है।

    मुगलों को गायब कर दिया था काले जादू से!

    असम में ये कहानी आम है कि 1332 ईस्वी में असम पर कब्जा जमाने के लिए मुगल बादशाह मोहम्मद शाह ने अपने घुड़सवारों के साथ चढ़ाई की थी। उस समय असम में हजारों तांत्रिक मौजूद थे और उन्होंने मायोंग को बचाने के लिए एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी थी। जिसके बाहर पहुंचते ही सैनिक गायब हो जाते थे।

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    मायोंग के सरोवर में पारंपरिक क्रियाएं करते लोग।
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    मायोंग में लगी तंत्र साधक की प्रतिमा।
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    तंत्र पीठ मां कामाख्या का मंदिर मायोंग से 40 किमी की दूरी पर है।
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