Home » Jeevan Mantra »Jyotish »Rashi Aur Nidaan » Akshay Tritya 2018, Read Akshay Tritya Muhurat And Puja Vidhi, Mahalaxmi Ki Puja Vidhi, Laxmi Pujan Vidhi In Hindi, अक्षय तृतीया 2018 के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

अक्षय तृतीया 2018- ऐसे बोलें महालक्ष्मी का ये एक मंत्र, मिल सकती है लक्ष्मी कृपा

देवी लक्ष्मी की पूजा से कुंडली के सभी दोष भी दूर हो सकते हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 18, 2018, 11:00 AM IST

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    यूटिलिटी डेस्क. बुधवार, 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया है और इस दिन देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर सही तरीके से की गई पूजा से लक्ष्मी की स्थाई कृपा मिल सकती है। देवी लक्ष्मी की पूजा से धन संबंधी परेशानियां दूर हो सकती हैं। महालक्ष्मी पूजा करने के बाद ऊँ महालक्ष्मयै नमः मंत्र का जाप 108 बार करें। जानें उज्जैन के इंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी पं. सुनील नागर के अनुसार लक्ष्मी पूजन की सरल विधि...

    लक्ष्मी पूजन के लिए सामग्री

    गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, वस्त्र और आभूषण। चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, अष्टगंध। गुलाब के फूल। प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा आदि चीजें पूजा में रखें।

    लक्ष्मी पूजा की सामान्य विधि

    किसी भी पूजा की शुरुआत में श्री गणेश का पूजन किया जाता है। भगवान गणेश को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। फूल, चावल और प्रसाद चढ़ाएं।

    गणेशजी की पूजा के बाद देवी लक्ष्मी का पूजन करें। माता लक्ष्मी की चांदी, पारद या स्फटिक की प्रतिमा के पूजन से भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है। लक्ष्मी की मूर्ति घर के मंदिर में रखें। मूर्ति में माता लक्ष्मी आवाहन करें। आवाहन यानी माता लक्ष्मी को अपने घर बुलाएं। प्रतिमा को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और फिर जल से कराएं।

    मां लक्ष्मी को वस्त्र चढ़ाएं। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। पुष्पमाला पहनाएं। सुगंधित इत्र अर्पित करें। कुमकुम से तिलक करें। धूप-दीप जलाएं। माता लक्ष्मी को गुलाब के फूल विशेष प्रिय हैं, ये फूल चढ़ाएं। बिल्वपत्र और बिल्व फल अर्पित करने से भी महालक्ष्मी की प्रसन्नता होती है। ये भी चढ़ाएं। प्रसाद में मिठाई चढ़ाएं। चावल के 11 या 21 दानें अर्पित करें। आरती करें। आरती के बाद परिक्रमा करें। महालक्ष्मी पूजा में ऊँ महालक्ष्मयै नमः मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।

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