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परंपरा: नेपाल में लड़कियों को क्यों और कैसे बनाया जाता है कुमारी देवी?

नेपाल के लोगों का मानना है कि ये जीवित देवियां आपदा के समय उनकी रक्षा करती हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 18, 2018, 05:00 PM IST

  • परंपरा: नेपाल में लड़कियों को क्यों और कैसे बनाया जाता है कुमारी देवी?

    रिलिजन डेस्क। भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भी हिंदू धर्म से जुड़ी अनेक परंपराएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक परंपरा है छोटी लड़कियों को कुमारी देवी बनाने की। इस परंपरा के अंतर्गत 3 वर्ष की लड़कियों को महाकाली का स्वरूप माना जाता है और जब तक ये जवान नहीं हो जातीं, अर्थात जब तक इन्हें मासिक धर्म शुरू नहीं हो जाता, तब तक ये कुमारी देवी की पदवी पर रहती हैं और उसके बाद कोई अन्य बालिका कुमारी देवी बनाई जाती है।


    रॉयल गॉडेस होती हैं कुमारी देवी
    इस परंपरा की शुरुआत 17वीं शताब्दी के आरंभ में हुई थी। नेपाल के लोगों का मानना है कि ये जीवित देवियां आपदा के समय उनकी रक्षा करती हैं। जीवित देवी या कुमारी देवी शाक्य या वज्रचार्य जाति से संबंध रखती हैं। इन्हें नेवारी समुदाय द्वारा पहचाना जाता है। नेपाल में करीब 11 कुमारी देवियां होती हैं, जिनमें से रॉयल गॉडेस या कुमारी देवी को सबसे प्रमुख माना गया है।



    ऐसे चुनी जाती हैं जीवित देवियां
    शाक्य और वज्राचार्य जाति की बच्चियों को 3 वर्ष का होते ही अपने परिवार से अलग कर दिया जाता है और उन्हें कुमारी नाम दे दिया जाता है। कुमारी देवी बनाने से पहले लड़कियों के सामने भैंस का कटा सिर रखा जाता है। कोई भी साधारण बच्ची उस दृश्य को देखकर भयभीत हो जाएगी लेकिन जो भी बच्ची बिना किसी डर के वहां रहती है, उसे मां काली का अवतार मानकर कुमारी देवी बनाया जाता है।


    शाक्य वंश के लोग करते हैं सुरक्षा
    कुमारी देवी बनने के बाद उन्हें कुमारी घर में रखा जाता है, जहां रहकर वे अपना ज्यादातर समय पढ़ाई और धार्मिक कार्यों में बिताती हैं। वह केवल त्यौहार के समय ही घर से बाहर निकल सकती हैं। जब भी किसी त्यौहार पर कुमारी देवी अपने आवास से बाहर निकलती हैं तब उनकी रक्षा का जिम्मा संभाले हुए शाक्य वंश के लोग उनकी पालकी को अपने कंधे पर उठाकर नगर में घुमाते हैं। ऐसी मान्यता है कि कुमारी देवी के दर्शन करना बहुत शुभ होता है।

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