Home » Jeevan Mantra »Jeene Ki Rah »Dharm Granth » Know The Types Of Friend According To Mahabharata, भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताई थीं मित्रों से जुड़ी ये बातें, आप भी रखें ध्यान

भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताई थीं मित्रों से जुड़ी ये बातें, आप भी रखें ध्यान

दोस्ती दुनिया के खास रिश्तों में से एक हैं, क्योंकि ये रिश्ता हमें जन्म से नहीं मिलता बल्कि अपने दोस्त हम खुद चुनते हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 18, 2018, 05:00 PM IST

  • भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताई थीं मित्रों से जुड़ी ये बातें, आप भी रखें ध्यान

    रिलीजन डेस्क। दोस्ती दुनिया के सबसे खास रिश्तों में से एक हैं, क्योंकि ये रिश्ता हमें जन्म से नहीं मिलता बल्कि अपने दोस्त हम खुद चुनते हैं। खुशी हो या दुख, हर मौके पर दोस्त हमारे साथ खड़े होते हैं। महाभारत के शांति पर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को 4 प्रकार के मित्र यानी दोस्त बताए हैं। जानिए इनसे जुड़ी खास बातें-

    1. सहार्थ मित्र
    सहार्थ मित्र उसे कहते हैं, जो किसी शर्त पर एक-दूसरे की मदद करने के लिए मित्रता करते हैं। जैसे यदि कोई 2 लोग मिलकर व्यापार शुरू करते हैं और शर्त के अनुसार मुनाफा आधा-आधा बांट लेते हैं तो उन्हें सहार्थ मित्र कहेंगे।

    प्रसंग
    विराट नगर पर हमला करने से पहले त्रिगर्तदेश के राजा सुशर्मा ने दुर्योधन से कहा था कि जो भी रत्न, धन, गांव व भूमि हमारे हाथ लगेंगे, उसे हम आपस में बांट लेंगे। दुर्योधन ने भी सुशर्मा की यह बात मान ली थी। इस प्रकार किसी शर्त के अनुसार बनाए गए मित्र सहार्थ कहलाते हैं।

    2. भजमान मित्र
    जिन लोगों से पुश्तैनी (पैत्रक) मित्रता हो, वे भजमान कहलाते हैं। जैसे जिन लोगों के साथ हमारे पिता या दादा के मित्रतापूर्ण संबंध रहे हो, उनके परिवार के साथ हमारे भी अच्छे संबंध हों, तो ऐसे मित्र को भजमान कहते हैं।

    प्रसंग
    स्वर्ग की यात्रा पर जाने से पहले पांडवों ने श्रीकृष्ण के पोते वज्र को इंद्रप्रस्थ का और परीक्षित (अर्जुन का पोता) को हस्तिनापुर का राजा बनाया। राजा व्रज व परीक्षित अच्छे मित्र थे। इनके पिता व दादा की मित्रता भी पुश्तैनी थी। इस तरह ये भजमान मित्र हुए।


    3. सहज मित्र
    सहज मित्र हमारे नजदीकी रिश्तेदार होते हैं। इन्हें सहज मित्र इसलिए कहते हैं क्योंकि इनसे हम किसी शर्त या पुराने संबंधों के आधार पर मित्रता नहीं करते। नजदीकी रिश्तेदारी होने के कारण ये स्वभाविक रूप से हमारे मित्र बन जाते हैं।

    प्रसंग
    अर्जुन, श्रीकृष्ण की बुआ के पुत्र थे और वे अर्जुन पर स्वभाविक प्रेम भी रखते थे। श्रीकृष्ण ने अनेक बार अर्जुन की सहायता की तथा विपत्ति के समय उचित मार्ग दिखाया। इस प्रकार नजदीकी रिश्तेदारी होने के कारण श्रीकृष्ण अर्जुन के सहज मित्र थे।

    4. कृत्रिम मित्र
    कृत्रिम मित्र वो होते हैं, जिन्हें धन देकर मित्रता की जाती है। ऐसा तब होता है जब कोई दुश्मन अचानक हमला कर दे, उस स्थिति में आप थोड़ा धन देकर उससे मित्रता कर अपने प्राण व देश की रक्षा कर सकते हैं।

    प्रसंग
    राजसूय यज्ञ के दौरान जब अर्जुन ने प्राग्ज्योतिषपुर पर आक्रमण किया, तब वहां के राजा भगदत्त ने 8 दिन तक भयंकर युद्ध किया। जब उसे लगा कि वह किसी भी तरह अर्जुन से जीत नहीं पाएगा तब उसने स्वेच्छा से थोड़ा धन देकर अर्जुन से मित्रता कर ली।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Know The Types Of Friend According To Mahabharata, भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताई थीं मित्रों से जुड़ी ये बातें, आप भी रखें ध्यान
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

Trending

Top
×