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श्रीकृष्ण ने भविष्य पुराण में खुद बताया है सूर्य पूजा का महत्व, आप भी 5 तरीकों से कर सकते हैं सूर्य देव को प्रसन्न

तांबे के बर्तन का दान करें और एक मंत्र बोलकर चढ़ाएं सूर्य को जल

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 13, 2018, 04:16 PM IST

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रिलिजन डेस्क. अगर रोज सुबह सूर्य को जल चढ़ाया जाए और पूजा की जाए तो बड़ी-बड़ी परेशानियां भी आसानी से दूर हो सकती हैं। सूर्य पूजा का महत्व भविष्य पुराण के ब्राह्म पर्व में श्रीकृष्ण और सांब को बताया है। सांब श्रीकृष्ण के पुत्र थे। श्रीकृष्ण के अनुसार सूर्यदेव एकमात्र प्रत्यक्ष देवता हैं यानी सूर्यदेव को सीधे देखा जा सकता है। जो भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति से सूर्य की पूजा करता है, उसकी सभी इच्छाएं सूर्य भगवान पूरी करते हैं।श्रीकृष्ण ने सांब को बताया कि स्वयं उन्होंने भी सूर्य की पूजा की है और इसी के प्रभाव के उन्हें दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई है।अगर आप भी हर रोज सूर्य की पूजा करेंगे तो आपको भी शुभ फल मिल सकते हैं। यहां जानिए भविष्य पुराण में श्रीकृष्ण द्वारा बताए गए सूर्य पूजा के कुछ सरल उपाय...
1. सुबह स्नान के बाद भगवान सूर्य को जल अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरे, इसमें चावल, फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
2. जल अर्पित करने के बाद सूर्य मंत्र का जाप करें। इस जाप के साथ शक्ति, बुद्धि, स्वास्थ्य और सम्मान की कामना से करें।
सूर्य मंत्र - ऊँ खखोल्काय स्वाहा
3. इस प्रकार सूर्य की आराधना करने के बाद धूप, दीप से सूर्य देव का पूजन करें।
4. सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, माणिक्य, लाल चंदन आदि का दान करें। अपनी श्रद्धानुसार इन चीजों में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है। इससे कुंडली में सूर्य के दोष दूर हो सकते हैं।
5. सूर्य के लिए रविवार का व्रत करें। एक समय फलाहार करें और सूर्यदेव का पूजन करें।
सूर्य को माना जाता है ग्रहों का राजा
- ज्योतिष के अनुासार 12 ग्रह होते हैं और सूर्य को इनका राजा माना जाता है। ऐसे में माना जाता है कि सूर्य देव की साधना करने से बाकि ग्रह भी आपको परेशानी नहीं पहुंचाते।
- वेदों में सूर्य को संसार की आत्मा माना गया है। ऋग्वेद के देवताओं कें सूर्य का महत्वपूर्ण स्थान है। यजुर्वेद के अनुसार सूर्य को भगवान का नेत्र माना जाता है।
- छान्दोग्यपनिषद के अनुसार सूर्य की ध्यान साधना करने से पुत्र की प्राप्ति होती है। ब्रह्मवैर्वत पुराण तो सूर्य को परमात्मा स्वरूप मानता है।
राम भगवान भी करते थे सूर्य पूजा
- भगवान राम सूर्य पूजा करते थे वहीं महाभारत में कर्ण भी हर रोज सूर्य की पूजा करते थे और सूर्य को अर्घ्य देते थे। ।
- ऐसा माना गया है कि इससे व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान मिलता है और भाग्योदय में आ रही बाधाएं दूर हो सकती हैं।

भविष्य पुराण
- भविष्य पुराण 18 प्रमुख पुराणों में से एक है। 215 अध्याय वाले इस पुराण में धर्म, सदाचार, नीति, उपदेश, अनेकों आख्यान, व्रत, तीर्थ, दान, ज्योतिष एवं आयुर्वेद के बारे में विस्तार से बताया गया है।
- महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित इस पुराण में भविष्य में होने वाली घटनाओं का वर्णन किया है। इसमें कई घटनाओं के बारे में उन्होने हाेने से पहले ही बता दिया था।

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