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शास्त्र कहते हैं: अनजाने में हुई गई जीव हत्या भी मानी जाती है पाप , गरूण पुराण में बताए इन तीन उपाय से कर सकते हैं प्रायश्चित

पैदल चलते समय न जाने कितने छोटे-छोटे जीव-जंतु हमारे पैरों के नीचे दब कर मर जाते हैं।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 18, 2018, 12:16 PM IST

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रिलिजन डेस्क.कई बार वाहन चलाते हुए या कुछ काम करते समय जाने-अनजाने में हम से जीव हत्या हो जाती है। इसके अलावा भी पैदल चलते समय न जाने कितने छोटे-छोटे जीव-जंतु हमारे पैरों के नीचे दब कर मर जाते हैं। ग्रंथों में इसे भी पाप माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, इस पाप का अशुभ परिणाम हमें आने वाले भविष्य में भुगतना पड़ सकता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार,ग्रंथों में इस पाप से छुटकारा पाने के लिए प्रायश्चित का विधान बताया गया है, जिससे अशुभ परिणामों से बचा जा सके। ये उपाय हम आसानी से कर सकते हैं। ये उपाय इस प्रकार हैं…
पहला उपाय
- एक सूखा नारियल लेकर उसके ऊपर का कुछ हिस्सा काट दें, जिससे उसमें एक छेद हो जाए।

- अब इस छेद में से उस नारियल में शक्कर डालकर उसे पूरा भर दें। इसके बाद उस नारियल को किसी सुनसान जगह पर जमीन के नीचे गाड़ दें।

- जिससे चींटी आदि जीव-जंतु उसे आसानी से खा सके। इस उपाय से जीव हत्या के पाप का प्रायश्चित तो होगा ही साथ ही राहु-केतु के दोष भी कम होंगे।
दूसरा उपाय
- शनिवार को किसी गरीब या दिव्यांग व्यक्ति को खाना खिलाएं। इससे जीव हत्या के पाप से बच जाएंगे।
तीसरा उपाय
- हर महीने की अमावस्या तिथि पर गाय को हरा चारा खिलाएं, कुत्ते को रोटी दें और मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं। इन उपायों से आपके कुंडली के दोष भी कम होंगे।
सिर्फ परमात्मा को है जीवन-मृत्यु देने का अधिकार
- गरूण पुराण और अन्य धर्म शास्त्रों में जीव हत्या को पाप माना गया है।

- इनके अनुसार तीनों लोकों में आने वाली सभी जीव-जन्तुओं को जीवन और मृत्यु देने का अधिकार केवल परमात्मा को ही है।

- यदि अन्य कोई ऐसा करता है तो उसे जीव हत्या का पाप लगता है।

- अठारह पुराणों में गरुड़महापुराण का अपना एक विशेष महत्व है। इसके अधिष्ठातृदेव भगवान विष्णु है।

- इसमें विष्णु-भक्ति का विस्तार से वर्णन है। भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों का वर्णन किया गया है।

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