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कितने रुपए में हो सकती है हज यात्रा, अधिकतर लोग नहीं जानते 10 बातें

हज यात्री को दो कैटेगरी में यात्रा करने का अवसर मिलता है। पहली है ग्रीन कैटेगरी और दूसरी अजीजिया कैटेगरी।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 13, 2018, 05:23 PM IST

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    रिलिजन डेस्क।हर मुसलमान के लिए 5 जरूरी फर्ज में से एक है हज यात्रा करना। इसीलिए दुनियाभर से मुस्लिम हज के लिए सऊदी अरब पहुंचते हैं। भारत से भी बड़ी संख्या में मुसलमान इस पवित्र यात्रा पर जाते हैं। इस यात्रा पर एक व्यक्ति के लिए करीब ढाई लाख रुपए खर्च होते हैं।

    दो कैटेगरी में होती है हज यात्रा

    हज यात्री को दो कैटेगरी में यात्रा करने का अवसर मिलता है। पहली है ग्रीन कैटेगरी और दूसरी अजीजिया कैटेगरी। वर्ष 2018 में हज यात्रा के लिए ग्रीन कैटेगरी के लिए करीब 2 लाख 75 हजार रुपए का खर्च आएगा। जबकि अजीजिया कैटेगरी के लिए करीब 2 लाख 45 हजार रुपए खर्च होंगे। अलग-अलग सुविधाओं के आधार पर ये रकम कम या ज्यादा भी हो सकती है।

    ये है इस्लाम का सबसे बड़ा तीर्थ

    1.मुस्लिमों का सबसे बड़ा तीर्थ स्थान यानी काबा सऊदी अरब के मक्का में है। मुसलमान हज के लिए यहां आते हैं। काबा का अर्थ है खुदा का घर।

    2.काबा बहुत बड़ी मस्जिद में स्थित एक छोटी सी इमारत है। जो संगमरमर से बनी है। मान्यता है कि यह जन्नत से इंसान के साथ जमीन पर आया है।

    3.माना जाता है कि जब इब्राहिम काबा का निर्माण कर रहे थे, तब जिब्राइल ने उन्हें ये पत्थर दिया था। जिब्राइल को देवदूत माना जाता है। सभी मुसलमान नमाज करते वक्त काबा की ओर मुंह रखते हैं।

    4.हज यात्रा विभिन्न चरणों में पूरी होती है। इसकी शुरुआत इस्लामी कैलेंडर के माह जिलहज से होती है। सभी हज यात्रियों को मक्का पहुंचने से पहले मीकात नाम की सीमा से गुजरना होता है।

    5.इस सीमा में प्रवेश करने के लिए एहराम नाम का विशेष वस्त्र पहनना जरूरी होता है। यह बिना सीले चादर के दो टुकड़े होते हैं। जिनमें से एक को शरीर के निचले भाग में लुंगी बनाकर व दूसरे को कंधे पर लपेटा जाता है।

    6.यह वस्त्र पहनने के बाद किसी प्राणी या पेड़-पौधे के प्रति हिंसा नहीं की जाती, बाल नहीं काटे जाते आदि नियमों का पालन आवश्यक हो जाता है।

    7.इसके बाद अगले चरण में तवाफ की रस्म पूरी की जाती है। जिसमें हजयात्री काबा के पवित्र स्थान के चारों ओर अपनी शक्ति के अनुसार चक्कर लगाते हैं। सात चक्कर लगाने को एक तवाफ कहते हैं।

    8.तवाफ के बाद सईअ अर्थात् सफा-मरवाह नाम के दो रेगिस्तानी पहाड़ों पर दौड़ने की रस्म पूरी की जाती है। यहीं पर हज यात्री आबे-जम-जम नाम के पवित्र जल को पीते हैं।

    9.हज यात्रा की महत्वपूर्ण रस्मों में शैतान को पत्थर मारना भी आवश्यक है।

    10.सभी हज यात्री मीना और मजदलफा में ठहरकर वापस लौटते समय अपने साथ लाए गए पत्थरों को शैतान के स्थान पर फेंकते हैैं। इस तरह हज यात्रा पूरी की जाती है।

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