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जब किसी पुरुष के साथ हों ये 3 बातें तो समझ लें उसकी किस्मत है खराब

चाणक्य की नीतियों में सुखी और सफल जीवन के रहस्य छिपे हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 09, 2018, 05:55 PM IST

  • जब किसी पुरुष के साथ हों ये 3 बातें तो समझ लें उसकी किस्मत है खराब

    यूटिलिटी डेस्क.भाग्य और अभाग्य की बात अक्सर होती रहती है। भाग्य यानी सुख-समृद्धि और श्रेष्ठ जीवन। अभाग्य यानी दुख और परेशानियां। किसी व्यक्ति के साथ भाग्य है या अभाग्य, ये वर्तमान परिस्थितियों को देखकर समझा जा सकता है। आचार्य चाणक्य ने तीन परिस्थितियां ऐसी बताई हैं जो किसी भी पुरुष के दुर्भाग्य की ओर इशारा करती हैं। यहां जानिए ये तीन परिस्थितियां कौन-कौन सी हैं...

    चाणक्य नीति का श्लोक

    वृद्धकाले मृता भार्या बन्धुहस्ते गतं धनम्।

    भोजनं च पराधीनं त्रय: पुंसां विडम्बना:।।

    इस नीति में चाणक्य ने पहली बात ये बताई है कि किसी वृद्ध की पत्नी की मृत्यु सबसे बड़े दुर्भाग्य की बात है। यदि जवानी में जीवन साथी का साथ छुट जाता है तो पुरुष दूसरा विवाह भी कर सकता है, लेकिन बुढ़ापे में यह संभव नहीं हो पाता है। बुढ़ापे में जीवन साथी का साथ रहना बहुत महत्वपूर्ण होता है, इस समय में अकेलेपन से निराशा और मानसिक तनाव बढ़ाता है।

    दूसरी बात

    यदि हमारा पैसा किसी शत्रु या बुरे स्वभाव वाले लोगों के हाथों में चले जाए तो यह दुर्भाग्य की बात है। व्यक्ति का खुद का कमाया हुआ धन शत्रु के हाथ में चले गया तो दोहरी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक तो धन हानि होती है और दूसरी तरफ शत्रु हमारे धन का उपयोग हमारे विरुद्ध करेगा।

    तीसरी बात

    अभाग्य की तीसरी बात ये है कि किसी व्यक्ति का पराए घर में या गुलाम बनकर रहना। पराए घर में रहते हुए व्यक्ति को खुद की इच्छा से कोई भी काम करने के लिए दूसरों की अनुमति लेना पड़ती है। गुलाम बनकर या पराए घर में रहने वाले पुरुष की आजादी पूरी तरह छीन जाती है। ये जीवन भयंकर कष्ट देता है।

    चाणक्य की खास बातें...

    प्राचीन समय में आचार्य चाणक्य तक्षशिला के गुरुकुल में अर्थशास्त्र के आचार्य थे। चाणक्य की राजनीति में गहरी पकड़ थी। इनके पिता का नाम आचार्य चणीक था, इसी वजह से इन्हें चणी पुत्र चाणक्य भी कहा जाता है। संभवत: पहली बार कूटनीति का प्रयोग आचार्य चाणक्य द्वारा ही किया गया था।

    कूटनीतिज्ञ थे चाणक्य

    जब इन्होंने अपनी कूटनीति के बल पर सम्राट सिकंदर को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसके अतिरिक्त कूटनीति से ही इन्होंने चंद्रगुप्त जैसे सामान्य बालक को अखंड भारत का सम्राट भी बनाया। आचार्य चाणक्य द्वारा श्रेष्ठ जीवन के लिए चाणक्य नीति ग्रंथ रचा गया है। इसमें दी गई नीतियों का पालन करने पर जीवन में सफलताएं प्राप्त होती हैं।

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