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10 जगहें: लुंबिनी में हुआ था बुद्ध का जन्म, बोधगया में पाया था ज्ञान

वैशाख मास की पूर्णिमा को बुद्ध जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये 30 अप्रैल को है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 29, 2018, 05:33 PM IST

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    रिलिजन डेस्क। गौतम बुद्ध अपने जीवन काल में जहां-जहां गए, वे स्थान बौद्ध तीर्थ बन गए। बुद्ध जयंती (30 अप्रैल, सोमवार) के मौके पर हम आपको कुछ ऐसे ही स्थानों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें बौद्ध तीर्थ कहा जाता है-

    1. लुम्बिनी

    उत्तर प्रदेश के ककराहा गांव से 14 मील और नेपाल-भारत सीमा से कुछ दूर पर बना रुमिनोदेई नामक गांव ही लुम्बिनी है, जो गौतम बुद्ध के जन्म स्थान के रूप में प्रसिद्ध है।


    2. बोधगया

    यह स्थान बिहार के प्रमुख हिंदू पितृ तीर्थ 'गया' में स्थित है। गया एक जिला है। इसी स्थान पर बुद्ध ने एक वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया।


    3. सारनाथ

    यह जगह उत्तरप्रदेश के वाराणसी के पास स्थित है, जहां बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। यहीं से उन्होंने धम्मचक्र प्रवर्तन प्रारंभ किया था।


    4. कुशीनगर

    उत्तरप्रदेश के देवरिया जिले में स्थित इसी जगह पर महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण (मोक्ष) हुआ था। गोरखपुर जिले में कसिया नामक जगह ही प्राचीन कुशीनगर है। यहां पर बुद्ध के आठ स्तूपों में से एक स्तूप बना है, जहां बुद्ध की अस्थियां रखी थीं।


    5. श्रावस्ती का स्तूप

    पूर्वोत्तर रेलवे की गोरखपुर-गोंडा लाइन पर बसा बलरामपुर स्टेशन से 12 मील पश्चिम में सहेठ-महेठ नामक गांव ही प्राचीन श्रावस्ती है। बुद्ध लंबे समय तक श्रावस्ती में रहे थे। अब यहां बौद्ध धर्मशाला है तथा बौद्ध मठ और भगवान बुद्ध का मंदिर भी है।


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    6. सांची स्तूप

    भोपाल से 28 मील दूर सांची स्टेशन है। यहां कई बौद्ध स्तूप हैं जिनमें एक की ऊंचाई 42 फुट है। सांची से 5 मील सोनारी के पास 8 बौद्ध स्तूप हैं और सांची से 7 मील पर भोजपुर के पास 37 बौद्ध स्तूप हैं।

    7. चंपानेर (पावागढ़)

    गुजरात के बड़ौदा से 23 मील आगे चंपानेर स्टेशन है। यहां से 12 मील पर पावागढ़ स्टेशन है। पावागढ़ में प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप हैं, जहां भगवान बुद्ध की अस्थियां रखी हुई हैं। यह आठ प्रमुख स्तूपों में से एक है।

    8. पेशावर

    यह स्थान पाकिस्तान में है, जिसे बौद्ध काल में पुरुषपुर कहा जाता था। यहां सबसे बड़े और ऊंचे स्तूप के नीचे से बुद्ध भगवान की अस्थियां खुदाई में निकली थीं।

    9. बामियान

    अफगानिस्तान में बामियान क्षेत्र बौद्ध धर्म प्रचार का प्रमुख केंद्र था। इसे बौद्ध धर्म की राजधानी माना जाता था। यहां भगवान बुद्ध की बड़ी-बड़ी मूर्तियां आज भी मौजूद हैं। तालिबानियों ने इन मूर्तियों को तोप से खंडित कर दिया है।


    10. नालंदा

    बौद्ध विश्वविद्यालय नालंदा को देश का प्राचीनतम विश्वविद्यालय माना जाता है, यह पटना के पास है। भगवान बुद्ध अपने जीवन में कई बार नालंदा आए थे। यह स्थान न केवल ज्ञान, बल्कि विभिन्न कलाओं का केंद्र भी रहा है। नालंदा में पुरातत्व संग्रहालय में भी बौद्ध धर्म के देवी-देवता और भगवान बुद्ध की प्रतिमा मौजूद हैं।

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