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श्री लक्ष्मी जी की आरती

ऊँ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।। ऊँ जय लक्ष्मी माता।

Dharm desk | Last Modified - Jul 12, 2018, 06:01 PM IST

श्री लक्ष्मी जी की आरती
आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। भगवान को प्रसन्न करना। इसमें परमात्मा में लीन होकर भक्त अपने देव की सारी बलाए स्वयं पर ले लेता है और भगवान को स्वतन्त्र होने का अहसास कराता है।
आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना। यानी कि देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति हमारे मन को प्रकाशित कर दें। व्यक्तित्व को उज्जवल कर दें। बिना मंत्र के किए गए पूजन में भी आरती कर लेने से पूर्णता आ जाती है। आरती पूरे घर को प्रकाशमान कर देती है, जिससे कई नकारात्मक शक्तियां घर से दूर हो जाती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं।

श्री लक्ष्मी माता की आरती


ऊँ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।।
ऊँ जय लक्ष्मी माता।
ब्रह्माणी रूद्राणी कमला, तुम ही जगमाता।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।।
ऊँ जय लक्ष्मी माता।
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि पाता।।
ऊँ जय लक्ष्मी माता।
तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशक, भवनिधि से त्राता।।
ऊँ जय लक्ष्मी माता।
जिस घर में तुम रहती सब सद्गुण आता।
सब सुंदर हो जाता, मन नहीं घबराता।।
ऊँ जय लक्ष्मी माता।
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