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हर साल लाखों विदेशी आते हैं भारत के इस मंदिर में, क्या है कारण?

Temple: पत्नी के श्राप के कारण सिर्फ यहां पूजे जाते हैं ब्रह्मा

जीवन मंत्र डेस्क | Last Modified - Nov 16, 2017, 05:00 PM IST

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    पुष्कर शहर

    पुष्कर शहर पौराणिक और धार्मिक दृष्टी से बहुत ही खास माना जाता है। पुष्कर का उल्लेख कई पुराणों और ग्रंथों में पाया जाता है। कहा जाता है कि चारों धामों की यात्रा करके अगर कोई व्यक्ति पुष्कर में स्नान न करे तो उसका सारा पुण्य नष्ट हो जाता है।

    पुष्कर की सबसे बड़ी खासियत है पूरे भारत का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर। सृष्टि के निर्माता, पालनकर्ता और संहारक भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश (भगवान शिव) को माना जाता हैं। भगवान विष्णु और शिव के तो पूरी दुनिया में कई मंदिर हैं, लेकिन भगवान ब्रह्मा का एकमात्र मंदिर होना कई लोगों के लिए रहस्य की बात है। भगवान ब्रह्मा के पूरी विश्व में एकमात्र मंदिर होने के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। इसके साथ ही पुष्कर की एक और खासितय है कि यहां पर हर साल लाखों की संख्या में विदेशी आते हैं और यहां के पुष्कर मेले का तो मुख्य आकर्षण ही विदेशी टूरिस्ट होते हैं।

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    पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में ब्रह्माजी और देवी गायत्री की मूर्ति

    इसलिए पूरे विश्व में सिर्फ पुष्कर में हैं ब्रह्मा मंदिर

    पुराणों के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी हाथ में कमल का फूल लिए हुए अपने वाहन हंस पर सवार होकर अग्नि यज्ञ करने के लिए उचित जगह की तलाश कर रहे थे, तभी एक जगह पर उनके हाथ से कमल का फूल गिर गया। फूल के धरती पर गिरते ही धरती पर एक झरना बन गया और उस झरने से तीन सरोवर बन गए। जिन जगहों पर वो तीन झरने बने उन्हें ब्रह्म पुष्कर, विष्णु पुष्कर और शिव पुष्कर के नाम से जाना जाता है। यह देखकर ब्रह्मा जी ने इसी जगह यज्ञ करने का निर्णय लिया।
    यज्ञ में ब्रह्मा जी के साथ उनकी पत्नी का होना जरुरी था। भगवान ब्रह्मा की पत्नी सावित्री वहां नहीं थी और शुभ मुहूर्त निकल रहा था। इस कारण ब्रह्मा जी ने उसी समय वहां मौजूद एक सुदंर स्त्री के विवाह करके उसके साथ यज्ञ संपन्न कर लिया। जब यह बात देवी सावित्री को पता चली तो उन्होंने क्रोधित होकर भगवान ब्रह्मा को यह श्राप दे दिया कि जिसने सृष्टि की रचना की पूरी सृष्टी में उसी की कहीं पूजा नहीं की जाएगी। पुष्कर को छोड़ कर पूरे विश्व में भगवान ब्रह्मा का कहीं मंदिर नहीं होगा। इसी श्राप की वजह से ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर पुष्कर में है।
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    पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर

    कैसे पड़ा इस शहर का नाम पुष्कर

    पुष्कर को मंदिरों और घाटों की नगरी भी कहा जाता हैं। इस छोटे से नगर में लगभग चार सौ मंदिर और 52 घाट हैं, जिनका निर्माण समय-समय पर अगल-अगल राजाओं ने करवाया था। पुष्कर शहर में पुष्कर नाम का कोई मंदिर नहीं है। इस जगह का नाम पुष्कर पड़ने का कारण है इसका अर्थ। पुष्कर शब्द का अर्थ होता है- पुष्प से बना तालाब या झील।
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    पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर

    ऐसा है यहां का ब्रह्मा मंदिर

    पुष्कर के पुष्कर नामक सरोवर से कुछ दूरी पर, ऊंचे पहाड़ पर भगवान ब्रह्मा का मंदिर स्थापित है। लगभग साठ सीढ़ियां चढ़ने के बाद मंदिर तक पहुंचा जाता है। मंदिर में भगवान ब्रह्मा की चार मुंह वाली सुंदर मूर्ति है, साथ ही भगवान ब्रह्मा की दूसरी पत्नी गायत्री (जिनके साथ भगवान ने यज्ञ किया) की भी प्रतिमा हैं। मंदिर के गर्भगृह के सामने एक चांदी का कछुआ बना हुआ है। मंदिर परिसर में भगवान इन्द्र, कुबेर की भी मूर्तियां हैं।
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    पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में ब्रह्माजी और देवी गायत्री की मूर्ति

    बहुत ही खास है यहां का मेला

    इन सबके अलावा पुष्कर अपने खास मेले के लिए भी प्रसिद्ध है। कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को यहां मेला लगता है, जो पूर्णिमा तक चलता है। यह मेला इतना प्रसिद्ध है कि इसमें शामिल होने के लिए विदेशों से भी लोग आते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन पुष्कर के सरोवर में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है।
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    पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर

    ब्रह्मा मंदिर के अलावा भी कई प्रसिद्ध मंदिर है यहां

    पुष्कर के विश्व प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर के अलावा भी यहां कई और मंदिर स्थापित हैं। भगवान विष्णु यहां रंगनाथ जी के रूप में हैं। रंगनाथ मंदिर के अलावा एक बहुत ही सुंदर सरस्वती मंदिर भी हैं। इनके अलावा आत्मतेश्वर महादेव मंदिर, राम वैकुंठनाथ आदि मंदिर भी है।
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Web Title: Importance And Story Of Brahma Temple
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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