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हवा में झुलते खंभों पर टिका है ये अनोखा मंदिर, रामायण काल से जुड़ा है इतिहास

लेपाक्षी मंदिर: जिसके खंभे झूल रहे हैं हवा में, यहीं रावण ने मारा था जटायु को

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 10, 2018, 05:00 PM IST

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    भारत में ऐसे कई मंदिर है जो कि अपने चमत्कारों और कहानियों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। आंध्र प्रदेश की अनंतपुर में एक ऐसा ही मंदिर है, जो कि अपने ऐतिहासिक और चमत्कारी महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां की सबसे खास बात यह हैं कि इस मंदिर के स्तंभ बिना किसी सहारे के हवा में झूल रहे हैं। इसके अलावा इस मंदिर का बहुत संबंध रामायण काल से भी जुड़ा हुआ है।

    16वीं शताब्दी में हुआ था मंदिर का निर्माण

    यह अनूठा मंदिर बैंगलुरु से लगभग 100 किलोमीटर दूर आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले के एक लेपाक्षी गांव में है। ऐतिहासिक मत के अनुसार, यह मंदिर16वीं शताब्दी बनवाया गया था। इस मंदिर को लेपाक्षी मंदिर या वीरभद्र मंदिर भी कहते हैं। इस मंदिर की विशेषता ये है कि इस मंदिर के स्तम्भ बिना किसी सहारे के हवा में लटके हुए हैं। यहां के झूलते खंभों को लेकर यह मान्यता प्रचलित है कि इन खंभों के नीचे से अपनी साड़ी या कपड़े निकालने पर मनुष्य की मनोकामना पूरी हो जाती है।

    रामायण काल से जुड़ा है मंदिर

    लेपाक्षी गांव के साथ रामायण की एक कथा भी प्रचलित है। कथा के अनुसार, सीता हरण के समय पक्षिराज जटायु ने रावण से युद्ध किया था। उस समय युद्ध में घायल होकर जटायु यहीं गिर थे। जब भगवान राम सीता जी को खोजते हुए यहां पहुंचे तो उन्होंने जटायु से देख कर कहा उठो पक्षी, जिसे तेलुगु ‘ले पक्षी’ कहा जाता है। तभी से इस जगह का नाम लेपाक्षी पड़ गया। मंदिर परिसर के पास ही एक विशाल पैर की आकृति धरती पर अंकित है, जिसे भगवान राम के पैर का निशान मान कर पूजा जाता है।

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    ब्रिटिश इंजीनियर भी नहीं सुलझा पाया यहां का रहस्य

    यह मंदिर अपने झूलते खंभों के रहस्य की वजह से इतना प्रसिद्ध हो गया कि इसका रहस्य जानने के लिए एक ब्रिटिश इंजीनियर तक भारत आया था। इंजीनियर ने बहुत कोशिश की, लेकिन इस चमत्कार का रहस्य जान नहीं पाया और वह भी इस रहस्य को बिना सुलझाए वापिस चला गया।

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    यहां पर है नंदी की सबसे विशाल मूर्ति

    मंदिर के प्रवेश द्वार पर नंदी की एक विशाल प्रतिमा बनी हुई है। यह एक ही पत्थर से बनी देश की सबसे विशाल मूर्तियों में से एक मानी जाती है। मंदिर की दीवारों पर कई देवी-देवताओं और महाभारत-रामायण की कहानियां अंकित हैं।

    कैसे पहुंचें

    हवाई मार्ग- लेपाक्षी गांव से लगभग 100 कि.मी. की दूरी पर बैंगलुरु एयरपोर्ट है।

    रेल मार्ग- लेपाक्षी से सबसे करीब का रेल्वे स्टेशन अनंतपुर है। वहां तक रेल मार्ग से आकर सड़क मार्ग से लेपाक्षी पहुंचा जा सकता है।

    सड़क मार्ग- आंध्रप्रदेश के किसी भी शहर तक किसी अन्य साधन से आकर, वहां से निजी वाहन या बस की सहायता से लेपाक्षी पहुंचा जा सकता है।

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Web Title: The Mystery Behind The Hanging Pillar Of Lepakshi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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