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हनुमान जयंती 2018: इन मंदिरों में होती हैं हनुमानजी के साथ उनके पुत्र की पूजा, ये है मकरध्वज की कथा

शनिवार, 31 मार्च को हनुमान जयंती है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 31, 2018, 11:15 AM IST

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    यूटिलिटी डेस्क. हनुमानजी के संबंध में यही मान्यता प्रचलित है कि वे ब्रह्मचारी थे, लेकिन राजस्थान और गुजरात में ऐसे मंदिर हैं, जहां हनुमानजी के साथ उनके पुत्र मकरध्वज की भी पूजा होती है। उज्जैन के श्रीराम कथाकार पं. मनीष शर्मा के अनुसार हनुमानजी और मकरध्वज से जुड़ी एक लोक कथा प्रचलित है। यहां जानिए ये लोक कथा...


    प्रचलित कथा के अनुसार जिस समय हनुमानजी सीता की खोज में लंका पहुंचे। उस समय मेघनाद ने उन्हें पकड़ा और रावण के दरबार में प्रस्तुत किया। तब रावण ने उनकी पूंछ में आग लगवा दी और हनुमान ने जलती हुई पूंछ से पूरी लंका जला दी। पूंछ पर लगी आग को शांत करने के लिए हनुमानजी ने अपनी पूंछ समुद्र में डाल दी।
    उस समय उनके पसीने की एक बूंद पानी में टपकी, जिसे एक मछली ने पी लिया था। उसी पसीने की बूंद से वह मछली गर्भवती हो गई और उसे एक पुत्र उत्पन्न हुआ। उसका नाम पड़ा मकरध्वज। मकरध्वज भी हनुमानजी के समान ही महान पराक्रमी और तेजस्वी था।
    ये हैं हनुमानजी और मकरध्वज के मंदिर
    1. हनुमान मकरध्वज मंदिर (भेंट द्वारिका, गुजरात)
    हनुमानजी व मकरध्वज का एक मंदिर गुजरात के भेंटद्वारिका में है। यह स्थान मुख्य द्वारिका से दो किलोमीटर अंदर की ओर है। इस मंदिर को दांडी हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह वही स्थान है, जहां पहली बार हनुमानजी अपने पुत्र मकरध्वज से मिले थे। मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही सामने हनुमान पुत्र मकरध्वज की प्रतिमा है। वहीं पास में हनुमानजी की प्रतिमा भी है। इन दोनों प्रतिमाओं की विशेषता यह है कि इन दोनों के हाथों कोई भी शस्त्र नहीं है और यहां की मूर्तियां आनंदित मुद्रा में हैं।
    2. हनुमान मकरध्वज मंदिर (ब्यावर,राजस्थान)
    राजस्थान के अजमेर से 50 किलोमीटर दूर पर स्थित ब्यावर में हनुमानजी के पुत्र मकरध्वज का दूसरा मंदिर है। यहां मकरध्वज के साथ हनुमानजी की भी पूजा की जाती है। प्रत्येक मंगलवार व शनिवार को देश के अनेक भागों से श्रद्धालु यहां दर्शन करने के लिए आते हैं। यहां शारीरिक, मानसिक रोगों के अलावा ऊपरी बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है। साथ ही मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं।
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