Home » Jeevan Mantra »Tirth Darshan » Importance Of Sitamarhi,History Of Sitamarhi Tirth

सीताजी से जुड़ी 2 सबसे खास जगहें: एक जगह लिया जन्म-एक जगह समा गई धरती में

देवी सीता के जीवन से जुड़ी 2 खास जगहें, जहां आज भी वे करती हैं निवास

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Feb 21, 2018, 05:00 PM IST

  • सीताजी से जुड़ी 2 सबसे खास जगहें: एक जगह लिया जन्म-एक जगह समा गई धरती में, religion hindi news, rashifal news
    +2और स्लाइड देखें
    पुनाओरा मंदिर

    भगवान राम की पत्नी सीता के जन्म और समाधि से जुड़ी दो जगहें हैं, इन दोनों ही जगहों को सीतामढ़ी के नाम से जाना जाता है। एक सीतामढ़ी में माता सीता ने जन्म लिया था और दूसरी भूमि में समा गई थी। जिस सीतामढ़ी में भगवती ने जन्म लिया, वह आज बिहार राज्य का जिला और इन नगर को माता सीता के नाम से ही जाना जाता है। यहां के लोगों का मानना है कि माता सीता आज भी यहां निवास करती हैं और अपने भक्तों की सहायता करती हैं।

    कैसे हुआ था माता सीता का जन्म

    रामायण के अनुसार, त्रेतायुग में एक बार मिथिला नगरी में भयानक अकाल पड़ा था। कई सालों तक बारिश न होने से परेशान राजा जनक ने पुराहितों की सलाह पर खुद ही हल चलाने का निर्णय लिया। जब राजा जनक हल चला रहे थे तब धरती से मिट्टी का एक पात्र निकला, जिसमें माता सीता शिशु अवस्था में थीं। इस जगह पर माता सीता ने भूमि में से जन्म लिया था, इसलिए इस जगह का नाम सीतामढ़ी पड़ गया।

    बीरबल दास ने की यहां मूर्ति की स्थापना

    कहा जाता है कि कल सालों से यह जगह जंगल बन गई थी। एक बार लगभग पांच सौ साल पहले अयोध्या में रहने वाले बीरबल दास नाम के एक भक्त को माता सीता ने अयोध्या से यहां आने की प्रेरणा दी। कुछ समय बाद बीरबल दास यहां आया और उसने इस जंगल को साफ करके यहां पर मंदिर का निर्माण किया और उसमें सीता जी की मूर्ति स्थापित की।

    संतान पाने के लिए किया जाता है यहां स्नान

    बिहार में सीतामढ़ी नाम के रेलवे स्टेशन और बस अड्डे से लगभग 2 कि.मी. की दूरी पर माता सीता का जानकी मंदिर है। मंदिर के पीछे जानकी कुंड के नाम से एक प्रसिद्ध सरोवर है। इस सरोवर को लेकर मान्यता है कि इसमें स्नान करने से महिलाओं को संतान की प्राप्ति होती है।

    पुनाओरा मंदिर: माता सीता का जन्म स्थान

    जानकी मंदिर से लगभग 5 कि.मी. की दूरी पर माता सीता का जन्म स्थान है। इसी जगह पर पुनराओ मंदिर है। सीता जन्म के समय पर यहां बहुत भीड़ रहती है और भारी उत्सव मनाया जाता है।

  • सीताजी से जुड़ी 2 सबसे खास जगहें: एक जगह लिया जन्म-एक जगह समा गई धरती में, religion hindi news, rashifal news
    +2और स्लाइड देखें
    पंथ पाकार

    माता सीता के विवाह से जुड़ा पंथ पाकार

    सीतामढ़ी नगर की उत्तर-पूर्व दिशा में लगभग 8 कि.मी. दूर पंथ पाकार नाम की प्रसिद्ध जगह है। यह जगह माता सीता के विवाह से जुड़ी हुई है। इस जगह पर एक बहुत ही प्राचीन पीपल का पेड़ अभी भी है, जिसके नीचे पालकी बनी हुई है। कहा जाता है कि विवाह के बाद माता सीता पालकी में जा रहीं थीं तब उन्होंने कुछ समय के लिए इस पेड़ के नीचे आराम किया था।

    भगवान शिव का हलेश्वर मंदिर

    सीतामढ़ी की उत्तर-पश्चिम दिशा में लगभग तीन कि.मी. की दूरी पर हलेश्वर शिव मंदिर है। इसे हलेश्वर नाथ मंदिर भी कहा जाता हैं। मान्यता है कि एक समय पर विदेह नाम के राजा ने इस शिव मंदिर का निर्माण पुत्रयेष्टि यज्ञ के लिए करवाया था।

  • सीताजी से जुड़ी 2 सबसे खास जगहें: एक जगह लिया जन्म-एक जगह समा गई धरती में, religion hindi news, rashifal news
    +2और स्लाइड देखें
    सीतामढ़ी (उत्तर प्रदेश )

    एक और भी है सीतामढ़ी

    माता सीता से जुड़ी एक और सीतामढ़ी उत्तर प्रदेश राज्य के इलाहबाद और वाराणसी के बीच है। भगवान राम के द्वारा त्यागे जाने के बाद माता सीता इसी जगह पर ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में रहती थी। इसी जगह पर लव और कुश का जन्म हुआ था और माता सीता धरती में समा गई थी।

    कहा जाता है कि इस मंदिर की खोज स्वामी जितेन्द्रानंद तीर्थ ने की थी। आज इस जगह पर माता सीता का एक भव्य मंदिर है। पास में ही एक सुदंर झील भी है। झील के किनारे भगवान हनुमान की एक विशाल मूर्ति स्थापित है।

आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Importance Of Sitamarhi,History Of Sitamarhi Tirth
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

Trending

Top
×