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सिंहाचलमः सालभर चंदन के लेप से ढंकी रहती है इस मंदिर की मूर्ति, एक दिन ही होते हैं असली दर्शन

विशाखापट्टनम में सिंहाचलम मंदिर है, इसे भगवान नृसिंह का घर कहा जाता है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 01, 2018, 05:00 PM IST

  • सिंहाचलमः सालभर चंदन के लेप से ढंकी रहती है इस मंदिर की मूर्ति, एक दिन ही होते हैं असली दर्शन, religion hindi news, rashifal news
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    यूटिलिटी डेस्क. होली का त्योहार सतयुग में भक्त प्रहलाद से जुड़ा है। कहानी है कि हिरण्यकशिपु के बेटे प्रहलाद को विष्णु भक्त होने के कारण पिता ने यातनाएं दी थीं। बुआ होलिका ने उसे गोद में बैठाकर जलाने की कोशिश की लेकिन खुद जल गई। उसी प्रहलाद को हिरण्यकशिपु से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लिया था। वैसे तो भारत में भगवान नृसिंह के कई मंदिर हैं लेकिन विशाखापट्टनम में सिंहाचलम मंदिर है, इसे भगवान नृसिंह का घर कहा जाता है।

    आंध्रपदेश के विशाखापट्टनम से महज 16 किमी दूर सिंहाचल पर्वत पर स्थित ये मंदिर बहुत खास है। इस मंदिर की खासियत ये है कि यहां भगवान नृसिंह लक्ष्मी के साथ हैं, लेकिन उनकी मूर्ति पर पूरे समय चंदन का लेप होता है। केवल अक्षय तृतीया (इस साल 18 अप्रैल को) को ही एक दिन के लिए ये लेप मूर्ति से हटाया जाता है, उसी दिन लोग असली मूर्ति के दर्शन कर पाते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर को हिरण्यकशिपु के भगवान नृसिंह के हाथों मारे जाने के बाद प्रहलाद ने बनवाया था। लेकिन वो मंदिर सदियों बाद धरती में समा गया।

    सिंहाचलम देवस्थान की अधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इस मंदिर को प्रहलाद के बाद पुरुरवा नाम के राजा ने फिर से स्थापित किया था। पुरुरवा ने धरती में समाए मंदिर से भगवान नृसिंह की मूर्ति निकालकर उसे फिर से यहां स्थापित किया और उसे चंदन के लेप से ढ़ंक दिया। तभी से यहां इसी तरह पूजा की परंपरा है, साल में केवल वैशाख मास के तीसरे दिन अक्षय तृतीया पर ये लेप प्रतिमा से हटाया जाता है। इस दिन यहां सबसे बड़ा उत्सव मनाया जाता है। 13वीं शताब्दी में इस मंदिर का जीर्णोद्धार यहां के राजाओं ने करवाया था।

    ऐसे पहुंचे इस मंदिर तक…

    ये मंदिर विशाखापट्टनम शहर से करीब 16 किमी दूर स्थित है। विशाखापट्टनम तक रेल, बस और हवाई मार्ग की सुविधा है। विशाखापट्टनम से मंदिर तक बस से या निजी वाहन जाया जा सकता है।

    दर्शन का समय

    सुबह चार बजे से मंदिर में मंगल आरती के साथ दर्शन शुरू होते हैं। सुबह 11.30 से 12 और दोपहर 2.30 से 3 बजे तक दो बार आधे-आधे घंटे के लिए दर्शन बंद होते हैं। रात को 9 बजे भगवान के शयन का समय होता है।

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    अंदर से ऐसा दिखता है सिंहाचलम मंदिर।
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    सिंहाचलम मंदिर, विशाखापट्टनम
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