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हनुमान जयंती 2018: इस गांव में पंचायत नहीं हनुमानजी करते हैं विवादों का फैसला

भगवान की पूजा-अर्चना केवल मनोकामनाएं पूरी करने के लिए नहीं बल्कि सही और गलत की पहचान करने के लिए भी की जाती है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 31, 2018, 11:36 AM IST

  • हनुमान जयंती 2018: इस गांव में पंचायत नहीं हनुमानजी करते हैं विवादों का फैसला, religion hindi news, rashifal news

    यूटिलिटी डेस्क. भगवान की पूजा-अर्चना केवल मनोकामनाएं पूरी करने के लिए नहीं बल्कि सही और गलत की पहचान करने के लिए भी की जाती है। इसी बात का जीवंत उदाहरण मौजूद है छत्तीसगढ़ में। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के मगरपारा क्षेत्र में एक अनोखा हनुमान मंदिर है, जहां गांव के हर विवाद का फैसला हनुमानजी करते हैं।
    यहां शहर में पहले से ही उच्च न्यायालय होने के बावजूद भी ज्यादातर विवादों का निपटारा भगवान हनुमान के मंदिर में होता है। भगवान हनुमानजी सभी के दुखों को हरने वाला माने जाते हैं। वहां की पंचायत हनुमान जी को साक्षी मानकर फैसला करती है और लोगों को विश्वास है कि उस फैसले में हनुमानजी का आदेश होता है।

    बजरंगी पंचायत मंदिर
    बिलासपुर के इस क्षेत्र में एक ‘बजरंगी पंचायत’ नामक मंदिर है, जहां पिछले 80 साल से विवादों पर फैसलों के लिए हनुमानजी की शरण ली जाती है। किसी को, कैसी भी, कोई भी समस्या हो, वह उसका हल पाने के लिए बजरंगी पंचायत मंदिर में पहुंच जाता है।

    मंदिर का इतिहास
    इस मंदिर के निर्माण के पीछे भी स्थानीय लोगों में एक कहानी प्रचलित है। कहते हैं कि लगभग 80 साल पहले सुखरू नाई नामक एक हनुमान भक्त ने पीपल के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर हनुमानजी की छोटी सी प्रतिमा स्थापित की थी, जिसके बाद पंचायत के सदस्यों और हनुमान भक्तों के सहयोग से धीरे-धीरे मंदिर का निर्माण आरंभ किया गया। अंत में वर्ष 1983 में यह मंदिर बनकर पूरा हुआ।

    पुरानी परंपरा
    बस तभी से ही यह परंपरा चली आ रही है कि पंचायत में हनुमानजी को साक्षी मानकर फैसला किया जाएगा और इसे हर कोई हंसी-खुशी स्वीकार भी करता है। माना जाता है कि इस मंदिर में हनुमान प्रतिमा के सामने जो भी फैसला होता है, उसमें भगवान की इच्छा भी शामिल होती है।

    सब मानते हैं फैसला
    सभी लोग बजरंगबली का आशीष लेकर ही घरों में मांगलिक कार्यों की शुरुआत करते हैं। हर नववधू गृह-प्रवेश से पहले बजरंगबली का आशीर्वाद लेती है। इस मंदिर का महत्व आसपास के लोगों में इतना बढ़ गया है कि यहां खासतौर पर बड़े-बड़े आयोजन कराए जाते हैं। खासकर हनुमान जयंती के अवसर पर भव्य आयोजन किया जाता है, जहां दूर-दूर से भक्तों का जमावड़ा लगता है।

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