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अगर आप भी जाना चाहते हैं वैष्णो देवी मंदिर तो प्राचीन गुफा की ये बातें जरूर जान लें

जानिए माता वैष्णो देवी मंदिर से जुड़ी खास बातें

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 18, 2018, 11:49 AM IST

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    यूटिलिटी डेस्क. चैत्र मास के नवरात्र शुरू हो गए हैं और इन दिनों में माता के भक्त बड़ी संख्या में वैष्णो देवी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ये मंदिर भारत ही नहीं दुनियाभर में प्रसिद्ध है। माता का ये पवित्र तीर्थ जम्मू-कश्मीर की त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित है। जानिए वैष्णो देवी गुफा से जुड़े ऐसी ही खास बातें...

    गुफा भी है बहुत पवित्र

    - यहां एक गुफा में माता रानी भक्तों को दर्शन देती हैं। जितना महत्व वैष्णो देवी का है, उतना ही महत्व यहां की गुफा का भी है।

    - देवी के मंदिर तक पहुंचने के लिए एक प्राचीन गुफा का प्रयोग किया जाता था। यह गुफा बहुत ही चमत्कारी है।

    गुफा तक जाने का रास्ता

    - माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए अभी जिस रास्ते का इस्तेमाल किया जाता है, वह गुफा में प्रवेश का प्राकृतिक रास्ता नहीं है।

    - श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए नए रास्ते का निर्माण 1977 में किया गया था। वर्तमान में इसी रास्ते से श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचते हैं।

    कभी-कभी प्राचीन गुफा से भी होते हैं दर्शन

    यहां एक नियम ये है कि जब मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या दस हजार के कम होती है, तब प्राचीन गुफा का द्वार खोल दिया जाता है और भक्ता पुराने रास्ते से माता के दरबार तक पहुंच सकते हैं। ये सौभाग्य बहुत कम भक्तों को मिल पाता है।

    प्राचीन गुफा की मान्यता

    - मां माता वैष्णो देवी के दरबार में प्राचीन गुफा का महत्व काफी अधिक है। यहां प्रचलित मान्यता के अनुसार पुरानी गुफा में भैरव का शरीर मौजूद है।

    - माता ने यहीं पर भैरव को अपने त्रिशूल से मारा था और उसका सिर उड़कर भैरव घाटी में चला गया और शरीर इस गुफा में रह गया था।

    - प्राचीन गुफा का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि इसमें पवित्र गंगा जल प्रवाहित होता रहता है।

    गर्भजून गुफा की मान्यता

    - वैष्णो देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए कई पड़ाव पार करने होते हैं। इन पड़ावों में से एक है आदि कुंवारी या आद्यकुंवारी। यहीं एक और गुफा भी है, जिसे गर्भजून के नाम से जाना जाता है।

    - गर्भजून गुफा को लेकर मान्यता है कि माता यहां 9 महीने तक उसी प्रकार रही थी जैसे एक शिशु माता के गर्भ में 9 महीने तक रहता है।

    - गर्भजून गुफा के बारे में कहा जाता है कि इस गुफा से होकर जाने से व्यक्ति को फिर से गर्भ में नहीं अाना पड़ता है यानी उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। अगर व्यक्ति का दोबारा जन्म होता भी है तो उसे कष्ट नहीं उठाना पड़ते हैं। उसका जीवन सुखी रहता है।

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    कैसे पहुंचे वैष्णो देवी

    हवाई मार्ग- अगर आप हवाई मार्ग से वैष्णो देवी जाना चाहते हैं तो आपको जम्मू पहुंचना होगा। जम्मू से वैष्णो देवी की दूरी करीब 48 किमी है। हर रोज दिल्ली, मुंबई, श्रीनगर और भारत के सभी बड़े महानगरों से यहां पहुंचने के लिए कई फ्लाइट्स उपलब्ध हैं।

    रेल यात्रा-अगर रेल मार्ग से जाना चाहते हैं तो जम्मू तक पहुंचने के लिए सभी बड़े शहरों से ट्रेन मिल जाती हैं। कटरा तक भी रेल मार्ग है। वैष्णो देवी की यात्रा के लिए कटरा पहला पड़ाव है।

    सड़क मार्ग-जम्मू तक आप सड़क मार्ग से भी आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके बाद कई बसें मिल सकती हैं और अगर आप चाहे तो प्राइवेट कार से भी जा सकते हैं।

    कब जाना चाहिए वैष्णो देवी

    हालांकि पूरे साल ये मंदिर भक्तों के लिए खुला रहता है, लेकिन सर्दी के दिनों में यहां थोड़ी परेशानी हो सकती है। बाकी दिनों में यहां की यात्रा बहुत ही आनंददायक रहती है।

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