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ये हैं देवी के 3 अनोखे मंदिर, हर एक से जुड़ी है कोई खास बात

चैत्र नवरात्र में इन दिनों प्रमुख माता मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 19, 2018, 05:00 PM IST

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    यूटिलिटी डेस्क. चैत्र नवरात्र में इन दिनों प्रमुख माता मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। इस मौके पर हम आपको कुछ ऐसे प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जो अपने चमत्कारों और इतिहास के लिए प्रसिद्ध हैं।

    करणी माता मंदिर (राजस्थान)

    राजस्थान के प्रसिद्ध शहर बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर एक छोटा से गांव में देवी एक अद्भुत मंदिर है। यह मंदिर जोधपुर के सड़क मार्ग पर ही पड़ता है। इस मंदिर की सबसे खास बात यहां पर दिया जाने वाले प्रसाद है। इस मंदिर में भक्तों को प्रसाद के रूप में चूहों का झूठा प्रसाद दिया जाता है। इस मंदिर में करणी माता के साथ-साथ हजारों चूहे भी रहते हैं। जिस वजह से इसे चूहे वाला मंदिर भी कहा जाता है।

    माना जाता है कि करणी माता साक्षात देवी दुर्गा का ही अवतार हैं। यहां के निवासियों का कहना है कि कई हजार साल पहले इसी जगह की एक गुफा में देवी दुर्गा ने करणी अवतार लिया था और कई सालों तक उसी गुफा में ध्यान करती रहीं। मंदिर के परिसर में कई काले और सफेद चूहे घूमते रहते हैं। यहां की एक मान्यता है कि अगर किसी भक्त को मंदिर में सफेद चूहे के दर्शन हो जाते हैं तो उसकी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं।

    कैसे पहुंचें-
    बीकानेर आप तीनों मार्गों से पहुंच सकते हैं। यहां का नजदीकी हवाई अड्डा जोधपुर स्थित है। रेल मार्ग के लिए आप बीकानेर और लालगढ़ रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। आप चाहें तो सड़क मार्ग से भी यहां तक का सफर तय कर सकते हैं। बीकानेर सड़क मार्गों द्वारा राजस्थान के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।



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    बगलामुखी माता मंदिर (मध्यप्रदेश)
    तंत्र शास्त्र में दस महाविद्याओं का उल्लेख मिलता हैं। उनमें से एक हैं बगलामुखी। माता बगलामुखी के पूरे विश्व में केवल तीन ही प्राचीन मंदिर माने जाते हैं, जिन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है। जिनमें से एक है दतिया (मध्यप्रदेश) में, दूसरा है कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) और तीसरा नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में।

    ऐसा है मंदिर का स्वरूप
    मध्यप्रदेश के शाजापुर नामक जिले में नलखेड़ा नाम की एक छोटी सी जगह है। यहां पर माता बगलामुखी का एक सुंदर मंदिर है, जो की तांत्रिक क्रियाओं के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि जो भी मनुष्य अपनी इच्छा पूरी करने के लिए पूरी श्रद्धा के साथ बगलमुखी माता की पूजा करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
    इस मंदिर में माता बगलामुखी के साथ-साथ माता लक्ष्मी, भगवान श्रीकृष्ण, भगवान हनुमान, भैरव देव और देवी सरस्वती भी विराजमान हैं। इस मंदिर में बिल्वपत्र, चंपा, सफेद आँकड़ा, आँवला, नीम एवं पीपल के पेड़ एक साथ स्थित हैं। इसके आसपास सुंदर और हरा-भरा बगीचा बना हुआ है। नवरात्र में यहां पर भक्तों की भीड़ लगी रहती है।


    कैसे पहुंचें -
    नलखेड़ा के बगलामुखी मंदिर स्थल के सबसे निकटतम इंदौर का एयरपोर्ट है। ट्रेन द्वारा इंदौर से 30 किमी पर स्थित देवास या लगभग 60 किमी मक्सी पहुंचकर भी शाजापुर जिले के गाँव नलखेड़ा पहुंच सकते हैं।

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    सिमसा माता मंदिर (हिमाचल प्रदेश)
    हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के लड़-भड़ोल तहसील के सिमस नामक खूबसूरत जगह पर माता सिमसा का एक चमत्कारी मंदिर है। यह एक ऐसा मंदिर है, जहां माता सिमसा हर रोज अपना चमत्कार दिखाती है।

    ये है इस मंदिर की विशेषता
    माता सिमसा या देवी सिमसा को संतान-दात्री के नाम से भी जाना जाता है, क्यों इस मंदिर में प्रार्थना करने से निःसंतान महिलाओं को संतान की प्राप्ति होती है। हर वर्ष यहां कई नि:संतान दंपति संतान पाने की इच्छा ले कर माता सिमसा के दरबार में आते हैं।
    नवरात्र में नि:संतान महिलाएं माता सिमसा के मंदिर में डेरा डालती हैं और दिन रात मंदिर के फर्श पर सोती हैं। कहा जाता है कि जो महिलाएं माता सिमसा के प्रति मन में श्रद्धा लेकर से मंदिर में आती है, माता सिमसा उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देती हैं।


    कैसे पहुंचें-
    नजदीकी हवाई अड्डा कांगड़ा है। मंडी या कांगड़ा की तरफ से आ रहे हैं तो पहले बैजनाथ पहुंचे। यहां से मात्र 25 किमी पर मंदिर है। जोगिन्दर नगर से मंदिर लगभग 50 किमी दूर है। मंडी व कांगड़ा रेलवे स्टेशन से भी आसानी से सिमसा माता मंदिर पहुंचा जा सकता है।

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