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जब भी जीवन में हो कोई दु:ख या परेशानी तो ये करें

दु:ख और आघात सभी की जिन्दगी में आते रहते हैं। अगर ये कहा जाए कि दु:ख तो जीवन का एक हिस्सा है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

जीवन मंत्र डेस्क | Last Modified - Nov 24, 2017, 05:00 PM IST

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    दु:ख और आघात सभी की जिन्दगी में आते रहते हैं। अगर ये कहा जाए कि दु:ख तो जीवन का एक हिस्सा है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। लेकिन कुछ खास बातों का ध्यान रखते हुए जीवन की इन विषम परिस्थितियों को आसान बनाया जा सकता है। जब भी जीवन में कोई दु:ख या परेशानी आए तो क्या करना चाहिए, जानिए-

    1.सबसे पहले तो ये कोशिश करिए ये दु:ख या परेशानी अल्पकालीन रहें, जितनी जल्दी हो इन्हें विदा कर दीजिए। इनका टिकना खतरनाक है। क्योंकि ये दोनों स्थितियां जीवन का नकारात्मक पक्ष है। यहीं से तनाव का आरम्भ होता है।

    2. तनाव यदि अल्पकालीन है तो उसमें से सृजन किया जा सकता है। रचनात्मक बदलाव के सारे मौके कम अवधि के तनाव में बने रहते हैं। लेकिन लम्बे समय तक रहने पर यह तनाव उदासी और उदासी आगे जाकर अवसाद यानी डिप्रेशन में बदल जाती है।

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    3. कुछ लोग ऐसी स्थिति में ऊपरी तौर पर अपने आपको उत्साही बताते हैं, वे खुश रहने का मुखौटा ओढ़ लेते हैं और कुछ लोग इस कदर डिप्रेशन में डूब जाते हैं कि लोग उन्हें पागल करार कर देते हैं। दार्शनिकों ने कहा है बदकिस्मती में भी गजब की मिठास होती है। इसलिए दु:ख, निराशा, उदासी के प्रति पहला काम यह किया जाए कि दृष्टिकोण बहुत बड़ा कर लिया जाए और जीवन को प्रसन्न रखने की जितनी भी सम्भावनाएं हैं उन्हें टटोला जाए।

    4. पैदा होने पर मान लेते हैं बस अब जिन्दगी कट जाएगी, लेकिन जन्म और जीवन अलग-अलग मामला है। जन्म एक घटना है और उसके साथ जो सम्भावना हमें मिली है उस सम्भावना के सृजन का नाम जीवन है।

    5. इसलिए केवल मनुष्य होना पर्याप्त नहीं है। इस जीवन के साथ होने वाले संघर्ष को सहर्ष स्वीकार करना पड़ेगा और इसी सहर्ष स्वीकृति में समाधान छुपा है। सत्संग, पूजा-पाठ, गुरु का सान्निध्य इससे बचने और उभरने के उपाय हैं।

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