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ये था महाभारत का असली बाहुबली, श्रीकृष्ण न बचाते तो चुटकियों में मारा जाता भीम

श्रीकृष्ण न बचाते तो भीम को चुटकियों में मार डालता महाभारत के ये असली बाहुबली

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Feb 05, 2018, 04:50 PM IST

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    अधिकांश लोग यही मानते हैं कि महाभारत में भीम ही सबसे बड़ा बाहुबली था। लेकिन एक पात्र और ऐसा है जो भीम की तरह ही बाहुबली था। वह पात्र है दुर्योधन के पिता धृतराष्ट्र। वे अंधे थे, लेकिन वे बहुत शक्तिशाली भी थे। महाभारत के अनुसार धृतराष्ट्र में दस हजार हाथियों का बल था यानी वे भीम से भी ज्यादा बलवान थे। युद्ध में जब पांडवों ने दुर्योधन और पूरी कौरव सेना का अंत कर दिया तो धृतराष्ट्र पुत्र शोक में बहुत दुखी थी।

    भीम को मार डालना चाहते थे धृतराष्ट्र

    - भीम ने धृतराष्ट्र के प्रिय पुत्र दुर्योधन और दु:शासन को बड़ी निर्दयता से मार डाला था, इस कारण धृतराष्ट्र भीम को भी मार डालना चाहते थे। जब युद्ध समाप्त हो गया तो श्रीकृष्ण के साथ युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव महाराज धृतराष्ट्र से मिलने पहुंचे।

    - युधिष्ठिर ने धृतराष्ट्र को प्रणाम किया और सभी पांडवों ने अपने-अपने नाम लिए, प्रणाम किया। श्रीकृष्ण महाराज के मन की बात पहले से ही समझ गए थे कि वे भीम को मार डालना चाहते हैं।

    - धृतराष्ट्र ने भीम को गले लगाने की इच्छा जताई तो श्रीकृष्ण ने तुरंत ही भीम के स्थान पर भीम की लोहे की मूर्ति आगे बढ़ा दी।

    - धृतराष्ट्र बहुत शक्तिशाली थे, उन्होंने क्रोध में आकर लोहे से बनी भीम की मूर्ति को दोनों हाथों से दबोच लिया और मूर्ति के टुकड़े-टुकड़े कर दिए।

    - मूर्ति तोड़ने की वजह से उनके मुंह से भी खून निकलने लगा और वे जमीन पर गिर गए।

    - कुछ ही देर में उनका क्रोध शांत हुआ तो उन्हें लगा की भीम मर गया है तो वे रोने लगे। तब श्रीकृष्ण ने महाराज से कहा कि भीम जीवित है, आपने जिसे तोड़ा है, वह तो भीम के आकार की मूर्ति थी। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने भीम के प्राण बचा लिए।

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    गांधार की राजकुमारी से विवाह

    भीष्म ने धृतराष्ट्र का विवाह गांधार की राजकुमारी गांधारी से कराया था। विवाह से पूर्व गांधारी को ये बात मालूम नहीं थी कि धृतराष्ट्र अंधे हैं। जब गांधारी को ये बात मालूम हुई तो उसने भी अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली। अब पति के साथ ही पत्नी भी अंधी हो गई। धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र और एक पुत्री थी। दुर्योधन सबसे बड़ा और सबसे प्रिय पुत्र था। दुर्योधन के प्रति धृतराष्ट्र को अत्यधिक मोह था। इसी मोह के कारण दुर्योधन के गलत कामों पर भी वे मौन रहे। दुर्योधन की गलत इच्छाओं को पूरा करने के लिए भी हमेशा तैयार रहते थे। यही मोह पूरे वंश के नाश का कारण बना।

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    ...और धृतराष्ट्र चले गए वन में

    युद्ध के बाद धृतराष्ट्र और गांधारी, पांडवों के साथ एक ही महल रहने लगे थे। भीम अक्सर धृतराष्ट्र से ऐसी बातें करते थे जो कि उन्हें पसंद नहीं थीं। भीम के ऐसे व्यवहार से धृतराष्ट्र बहुत दुखी रहने लगे थे। वे धीरे-धीरे दो दिन या चार दिन में एक बार भोजन करने लगे। इस प्रकार पंद्रह वर्ष निकल गए। फिर एक दिन धृतराष्ट्र के मन में वैराग्य का भाव जाग गया और वे गांधारी के साथ वन में चले गए।

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