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शीतला सप्तमी और अष्टमी पर ठंडा खाना ही क्यों खाते हैं, अधिकतर लोग नहीं जानते ये कारण

शीतला सप्तमी और अष्टमी पर शीतला माता की पूजा की जाती है।

यूटिलिटी डेस्क | Last Modified - Mar 07, 2018, 10:47 AM IST

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    गुरुवार, 8 मार्च को शीतला सप्तमी है और शुक्रवार, 9 मार्च को शीतला अष्टमी है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में सप्तमी और अष्टमी पर ठंडा खाना खाने की परंपरा है। वैसे तो हमें ठंडा भोजन नहीं खाना चाहिए, लेकिन साल में एक दिन ऐसा आता है जब हमें सिर्फ बासी यानी ठंडा भोजन ही खाना चाहिए। यहां जानिए उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए शीतला सप्तमी और अष्टमी पर ठंडा भोजन क्यों करना चाहिए...

    ऐसा होता है शीतला माता का स्वरूप

    शास्त्रों में बताया गया है कि शीतला माता गधे की सवारी करती हैं, उनके हाथों में कलश, झाड़ू, सूप (सूपड़ा) रहते हैं और वे नीम के पत्तों की माला धारण किए रहती हैं।

    - यह समय सर्दी (शीत ऋतु) के जाने का और गर्मी (ग्रीष्म ऋतु) के आने का समय है। दो ऋतुओं के संधिकाल में खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    - संधिकाल में आवश्यक सावधानी रखी जाती है तो कई मौसमी बीमारियों से बचाव हो जाता है।

    - हिन्दी पंचांग के अनुसार अभी चैत्र माह चल रहा है। इस माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली सप्तमी-अष्टमी को शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी कहा जाता है।

    - इन दो दिनों में शीतला माता के लिए व्रत रखा जाता है। जिन परिवारों में शीतला माता के लिए प्राचीन परंपरा का पालन किया जाता है, वहां इस एक दिन बासी खाना ही खाते हैं।

    - जो लोग शीतला सप्तमी या अष्टमी पर ठंडा खाना खाते हैं, उन्हें ठंड के प्रकोप से होने वाली कफ संबंधी बीमारियां होने की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं।

    - वर्ष में एक दिन सर्दी और गर्मी के संधिकाल में ठंडा भोजन करने से पेट और पाचन तंत्र को भी लाभ मिलता है। कई लोग को ठंड के कारण बुखार, फोड़े-फूंसी, आंखों से संबंधित परेशानियां आदि होने की संभावनाएं रहती हैं, उन्हें हर साल शीतला सप्तमी या अष्टमी पर बासी भोजन करना चाहिए।

    - यह परंपरा काफी पुराने समय से चली आ रही है और आज भी बड़ी संख्या में लोग इसका पालन करते हैं। सप्तमी से एक दिन पहले ही खाना बनाकर रख लिया जाता है और सप्तमी पर यही बासी भोजन खाते हैं। इस दिन गर्म खाना वर्जित किया गया है।

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