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ये 3 बातें बना सकती हैं आपको एक्सपर्ट, हर कदम मिलेगी कामयाबी

किसी भी काम में पारंगत होने के लिए जरूरी है एकाग्रता।

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 31, 2018, 05:00 PM IST

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    किसी भी काम में एक्सपर्ट होना चाहते हैं तो सबसे जरूरी है एकाग्रता। एकाग्रता (Concentration) के साथ किए गए हर काम में सफलता मिलने संभावनाएं काफी अधिक बढ़ जाती हैं। शरीर में शक्ति का संचय तभी होता है, जब शरीर को शक्ति संचय करने का समय मिले। ध्यान शरीर में मानसिक और शारीरिक शक्ति को इकठ्ठा करने का वो समय देता है। ध्यान एकाग्रता को बढ़ाता है। एकाग्रता किसी भी काम में परफेक्ट होने की पहली सीढ़ी होती है। बिना एकाग्र मन के कोई उपलब्धि हासिल नहीं की जा सकती।

    जब तक हम मन को एकाग्र करना नहीं सिखते, तब तक मन हमें कुछ और नहीं सिखने देता है। सबसे जरूरी है, अपने मन पर नियंत्रण किया जाए।

    हमारे ऋषि-मुनियों ने एकाग्रता पर बहुत काम किया है। कोई भी काम करते समय एकाग्रता का अभ्यास रखें। जब जो करें, पूरी एकाग्रता के साथ करें।

    एकाग्रता से तीन फायदे प्राप्त होते हैं।

    पहला- शक्ति उत्पन्न होती है।

    दूसरा- धैर्य जागता है।

    तीसरा- शक्ति और धैर्य के परिणाम में हम साहसी हो जाते हैं।

    इसी साहस से हमें हर उपलब्धि हासिल हो सकती है। भक्ति में एकाग्रता से भगवान की कृपा जल्दी प्राप्त होती है। इतिहास गवाह है कि जो-जो लोग भी खूब सफल हुए हैं, वे अपने कार्य के प्रति एकाग्र चित्त रहे हैं।

    एकाग्र चित्त होने का अभ्यास प्रतिदिन नियमित रूप से करना होगा। सीधा सा तरीका तो यह है कि कोई भी कार्य आरंभ करने के पहले बेकार विचार और गतिविधियों को विराम दें।

    निश्चय करें कि जो भी कुछ करना है, सोचना है, मिलना-जुलना है, वह किए जा रहे कार्य के बाद ही होगा। इस समय जो कर रहे हैं, बस वही करना है। यह दृढ़ता धीरे-धीरे एकाग्र चित्त बना देगी। हम जितने एकाग्र चित्त होंगे उतने ही जागे हुए रहेंगे।

    इसका अर्थ है जो एकाग्र चित्त है वह जागा हुआ है और जो जाग कर जी रहा है उसे लोग संन्यासी कहेंगे, वर्ना सोया हुआ व्यक्ति संसारी है। असुत्ता मुनि मतलब जो सोया हुआ नहीं है और सुत्ता अमुनि मतलब जो सोते हुए चल रहा है, वह असाधु है। इसलिए खूब काम करें, पर होश में करें। इसी को जागते हुए करना कहते हैं।

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