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नवरात्र- यहां गिरी थीं माता की आंखें, देवी मां पूरी करती हैं भक्तों की मनोकामनाएं

नवरात्र में माता के मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहती हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 21, 2018, 05:00 PM IST

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    यूटिलिटी डेस्क. अभी चैत्र मास के नवरात्र चल रहे हैं, इन दिनों में मां दुर्गा के सभी अवतारों की विशेष पूजा की जाती है। अधिकतर लोग माता के मंदिर जाते हैं और देवी दर्शन कर दुखों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। यहां जानिए भारत के एक बहुत खास देवी मंदिर के बारे में, यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। ये मंदिर है हिमाचल प्रदेश का नैना देवी मंदिर।

    51 शक्तिपीठों में से एक है नैनादेवी मंदिर

    नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में शिवालिक पर्वत क्षेत्र पर बना हुआ है। यहां पास ही प्रसिद्ध नैनीताल भी है। ये मां भगवती के 51 शक्ति पीठों में से एक है। मंदिर नेशनल हाईवे 21 से जुड़ा हुआ है। नैना देवी के दर्शन करने के लिए भक्त अपने निजी वाहनों से भी आसानी से मंदिर क्षेत्र में पहुंच सकते हैं।

    यहां गिरी थीं माता सती की आंखें

    पौराणिक मान्यता के अनुसार इस स्थान पर माता सती के नेत्र गिरे थे। मंदिर में पीपल का पेड़ आकर्षण का मुख्य केंद्र है। मंदिर के मुख्य द्वार पर गणेशजी और हनुमानजी की मूर्तियां विराजमान हैं। मुख्य द्वार के बाद शेर की दो प्रतिमाएं दिखाई देती हैं।

    मंदिर के गर्भ ग्रह में तीन मुख्य मूर्तियां है। एक तरफ माता काली, मध्य में नैना देवी और एक तरफ भगवान गणेश की प्रतिमा है।

    पास ही में पवित्र जल का तालाब है जो मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। मंदिर के पास ही एक गुफा भी है, जिसे नैना देवी गुफा के नाम से जाना जाता है।

    ये है पौराणिक कथा

    नैना देवी मंदिर 51 शक्ति पीठों मे से एक है। इन सभी की उत्पत्ति कथा एक ही है। यह सभी मंदिर शिव और शक्ति से जुड़े हुए हैं। ग्रंथों के अनुसार इन सभी स्थलों पर देवी सती के अंग गिरे थे। प्राचीन समय राजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने शिवजी और सती को आमंत्रित नहीं किया था। ये बात सती को काफी बुरी लगी और वह बिना बुलाए ही अपने पिता दक्ष के यज्ञ में पहुंच गई। यज्ञ स्‍थल पर शिवजी के लिए कही गई अपमानजनक बातों को सती सहन नहीं कर पाई और हवन कुंड में कुद गईं।

    जब भगवान शिव को ये बात मालूम हुई तो वे वहां आए और सती के शरीर को हवन कुण्ड से निकाल कर तांडव करने लगे। इस कारण सारे ब्रह्माण्ड में त्राही-त्राही मच गई। पूरे ब्रह्माण्ड को इस संकट से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से 51 भागो में बांट दिया। इसके बाद ये अंग जहां-जहां गिरे थे, वहां-वहां देवी के 21 शक्तिपीठ स्थापित हो गए। मान्यता है कि नैना देवी में माता सती नयन गिरे थे।

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    कैसे पहुंचे नैना देवी

    वायु मार्ग-हवाई जहाज से आने वाले भक्त चंडीगढ़ तक वायु मार्ग से पहुंच सकते हैं। इसके बाद बस या कार से नैना देवी पहुंच सकते हैं। इसके बाद दूसरा करीबी एयरपोर्ट अमृतसर में है।

    रेल मार्ग-इस मार्ग से आने के लिए आपको पहले चंडीगढ या पालमपुर पहुंचना होगा। इसके बाद बस, कार या अन्य वाहनों से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। चंडीगढ देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।

    सड़क मार्ग- नैनादेवी दिल्ली से करीब 350 किमी की दूरी पर स्थित है। दिल्ली से करनाल, चंडीगढ होते हुए नैना देवी पहुंच सकते हैं।

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