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आपकी किस्मत में कार का सुख है या नहीं, इस विधि से कर सकते हैं मालूम

अगर आप ये जानना चाहते हैं कि आपकी किस्मत में कार का सुख है या नहीं तो ये ज्योतिष से मालूम हो सकता है।

यूटिलिटी डेस्क | Last Modified - Feb 24, 2018, 05:00 PM IST

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    ज्योतिष के अनुसार कुंडली से मालूम हो सकता है कि व्यक्ति को कार या किसी अन्य मनचाहे वाहन को सुख मिलेगा या नहीं। यहां जानिए कोलकाता की एस्ट्रोलॉजर डॉ. दीक्षा राठी के अनुसार वाहन से जुड़े कुंडली के कुछ खास योग...

    वाहन सुख से जुड़े कुंडली के ग्रह, राशि और भाव

    कुंडली के चतुर्थ भाव को सुख का स्थान माना जाता है और शुक्र को वाहन सुख का कारक। किसी व्यक्ति को वाहन सुख मिलेगा या नहीं, यह जानने के लिए शुक्र और चौथे भाव के स्वामी ग्रह की स्थिति का अध्ययन किया जाता है। भाग्य एवं आय भाव भी वाहन सुख के लिए महत्वपूर्ण हैं।

    ग्रहों की स्थिति और वाहन सुख

    - कुंडली में चतुर्थ (चौथा) भाव का स्वामी जब उच्च राशि में शुक्र के साथ हो और चौथे भाव में सूर्य स्थित हो तो 30 वर्ष की उम्र के बाद वाहन सुख मिलने की संभावना रहती है।

    - एकादश (ग्याहरवां) भाव में चतुर्थ भाव का स्वामी बैठा हो एवं लग्न में शुभ ग्रह स्थित हो तो लगभग 12 से 15 वर्ष की आयु के बाद वाहन सुख मिल सकता है।

    - जब चतुर्थ भाव का स्वामी नीच राशि में बैठा हो एवं लग्न में शुभ ग्रह की स्थिति हो तो 12 से 15 वर्ष की आयु में मनचाहा वाहन मिल सकता है।

    - जिन लोगों की कुंडली में दशम भाव का स्वामी चतुर्थ भाव के स्वामी के साथ युति बनाता है और दशम भाव का स्वामी अपने नवमांश में उच्च का होता है तो वाहन सुख पाने में काफी समय लगता है।

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    - जब चौथे भाव का स्वामी, नवम, दशम या एकादश भाव के स्वामी के साथ युति संबंध बनाता है तो वाहन सुख मिलने की पूरी संभावना बनती है। यदि कुंडली में यह शुभ स्थिति हो, लेकिन वाहन सुख नहीं मिल रहा है तो संभव है कि इस संबंध पर किसी पाप ग्रह की दृष्टि पड़ रही है।

    - कुंडली में चतुर्थ भाव सुख का कारक होता है तथा भौतिक सुख देने वाला ग्रह शुक्र है, फिर भी इन दोनों की युति चतुर्थ भाव में होने पर बहुत अच्छा परिणाम प्राप्त नहीं होता है। इस स्थिति में व्यक्ति कार या अन्य वाहन ले सकता है, लेकिन यह सामान्य दर्जे का हो सकता है। शुक्र एवं चतुर्थ भाव के स्वामी के संबंध पर यदि पाप ग्रह का असर हो तो वाहन सुख नहीं मिलता है।

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    - कुंडली के चौथे घर का स्वामी और नवम भाव का स्वामी लग्न में युति बनाएं तो यह वाहन सुख के लिए इसे अच्छा योग माना जाता है। इस ग्रह स्थिति में व्यक्ति का भाग्य प्रबल होता है, जो उसे वाहन सुख दिलाता है।

    - कुंडली में नवम, दशम या एकादश भाव में शुक्र के साथ चतुर्थ भाव के स्वामी की युति होने पर बहुत ही अच्छा वाहन प्राप्त होता है। यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि चतुर्थ भाव के स्वामी का संबंध शनि के साथ हो या शनि शुक्र की युति हो तो वाहन सुख पाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है।

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