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25 मार्च से पहले करें ये 7 उपाय, बन सकते हैं बिगड़े काम

इन दिनों चारों ओर चैत्र नवरात्र की धूम है। 25 मार्च को चैत्र नवरात्र का अंतिम दिन है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 25, 2018, 04:51 PM IST

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    यूटिलिटी डेस्क. इन दिनों चारों ओर चैत्र नवरात्र की धूम है। 25 मार्च को चैत्र नवरात्र का अंतिम दिन है। इन 9 दिनों में देवी को प्रसन्न करने के लिए भक्त तरह-तरह के उपाय करते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ही आसान उपाय बता रहे हैं, जिसे करने से देवी मां की कृपा आप पर बनी रहेगी और आपके बिगड़ने काम फिर से बनने लगेंगे। ये उपाय उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा ने बताए हैं। इन उपायों के बारे में जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-


    दुर्गम का वध कर कहलाईं दुर्गा
    पुरातन काल में दुर्गम नामक एक दैत्य हुआ। उसने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न कर सभी वेदों को अपने वश में कर लिया, जिससे देवताओं का बल कम हो गया। दुर्गम ने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया। तब देवताओं को देवी भगवती का स्मरण हुआ। देवताओं ने शुंभ-निशुंभ, मधु-कैटभ तथा चण्ड-मुण्ड का वध करने वाली शक्ति का आह्वान किया।
    देवताओं के आह्वान पर देवी प्रकट हुईं। उन्होंने देवताओं से उन्हें बुलाने का कारण पूछा। सभी देवताओं ने एक स्वर में बताया कि दुर्गम नामक दैत्य ने सभी वेद तथा स्वर्ग पर अपना अधिकार कर लिया है तथा हमें अनेक यातनाएं दी हैं। आप उसका वध कर दीजिए। देवताओं की बात सुनकर देवी ने उन्हें दुर्गम का वध करने का आश्वासन दिया।
    यह बात जब दैत्यों का राज दुर्गम को पता चली तो उसने देवताओं पर पुन: आक्रमण कर दिया। तब माता भगवती ने देवताओं की रक्षा की तथा दुर्गम की सेना का संहार कर दिया। सेना का संहार होते देख दुर्गम स्वयं युद्ध करने आया। तब माता भगवती ने काली, तारा, छिन्नमस्ता, श्रीविद्या, भुवनेश्वरी, भैरवी, बगला आदि कई सहायक शक्तियों का आह्वान कर उन्हें भी युद्ध करने के लिए प्रेरित किया। भयंकर युद्ध में भगवती ने दुर्गम का वध कर दिया। दुर्गम नामक दैत्य का वध करने के कारण भी भगवती का नाम दुर्गा के नाम से भी विख्यात हुआ।


    देवीपुराण के अनुसार ये है दुर्गा शब्द का अर्थ
    दैत्यनाशार्थवचनो दकार: परिकीर्तित:।
    उकारो विघ्ननाशस्य वाचको वेदसम्मत:।।
    रेफो रोगघ्नवचनो गच्छ पापघ्नवाचक:।
    भयशत्रुघ्नवचनश्चाकार: परिकीर्तित:।।

    इस श्लोक के अनुसार, दुर्गा शब्द में द अक्षर दैत्यनाशक, उ अक्षर विघ्ननाशक, रेफ रोगनाशक, ग कार पापनाशक तथा आ कार शत्रुनाशक है। इसीलिए मां दुर्गा को दुर्गतिनाशिनी भी कहते हैं।

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