Home » Jeevan Mantra »Jyotish »Rashi Aur Nidaan » If You Want Debt Relief, Do This Measures.

चाहते हैं कर्ज से छुटकारा तो करें इन देवता की पूजा, ये हैं उपाय

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवग्रहों में मंगल का विशेष स्थान है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 28, 2018, 05:00 PM IST

  • चाहते हैं कर्ज से छुटकारा तो करें इन देवता की पूजा, ये हैं उपाय, religion hindi news, rashifal news
    +2और स्लाइड देखें

    यूटिलिटी डेस्क. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवग्रहों में मंगल का विशेष स्थान है। नवग्रह पूजन के समय दक्षिण दिशा में मंगल की स्थापना की जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, मंगलदेव की उत्पत्ति भगवान शिव से हुई है। कुछ ग्रंथों में इन्हें भगवान शिव के रक्त तो कुछ में वीर्य से उत्पन्न बताया गया है।
    उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, मंगल ग्रह पूर्व दिशा में उदित होता है और पश्चिम में अस्त। मंगल का एक नाम भौम भी प्रसिद्ध है। नवग्रह मंडल में मंगल को सेनापति माना गया है। पद्मपुराण के अनुसार, मंगल देवता की पूजा से कर्ज से मुक्ति मिलती है।

    ऐसा है इनका स्वरूप
    मंगल का रंग लाल बताया गया है। शास्त्रों में इनके पुरुष रूप का वर्णन मिलता है। ये अक्सर रथ पर चलते हैं। लेकिन कुछ ग्रंथों में इनका वाहन मेष यानी भेड़ भी बताया गया है।

    रक्तमाल्याम्बरधर: शक्तिशूलगदाधर: ।
    चतुर्भज: रक्तरोमा वरद: स्याद् धरासूत:॥
    - मत्स्यपुराण 94-37

    अर्थ- भूमिपुत्र मंगल देवता चतुर्भुज अर्थात इनके चार हाथ हैं। शरीर के रोए लाल रंग के हैं। हाथों में शक्ति, त्रिशूल और गदा है। एक हाथ वरमुद्रा में रहता है।


    ये उपाय करें-
    मंगल देशप्रेम, साहस, सहिष्णुता, धैर्य, कठिन परिस्थितियों एवं समस्याओं को हल करने की योग्यता तथा खतरों का सामना करने की ताकत देता है। इसीलिए मंगल की पूजा की जाती है। मंगल की शांति के लिए ये उपाय करना चाहिए-

    1. भगवान शिव की स्तुति करे
    2. प्रवाल यानी मूंगा रत्न धारण करें।
    3. तांबा, सोना, गेहूं, लाल वस्त्र, लाल चंदन, लाल फूल, केसर, कस्तूरी, लाल बैल, मसूर की दाल, भूमि का दान करें।


    मंगलदेव व मंगल ग्रह से जुड़ी अन्य बातें जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-

  • चाहते हैं कर्ज से छुटकारा तो करें इन देवता की पूजा, ये हैं उपाय, religion hindi news, rashifal news
    +2और स्लाइड देखें

    उत्पत्ति के बाद पृथ्वी ने कराया स्तनपान
    मंगल की उत्पत्ति शिव के तेज (वीर्य) से मानी जाती है। भविष्यपुराण में शिव के रक्तबिंदु से और स्कंदपुराण में अश्रुबिंदु से इनकी उत्पत्ति मानी गई है। स्कंदपुराण में इसकी कथा है। कहते हैं भगवान शंकर ने हिरण्याक्ष की विकेशी नाम की कन्या से विवाह किया था। एक दिन वे विकेशी के साथ एकांत में थे। तभी वहां अग्नि आ पहुंचा। इससे शंकर क्रोध से लाल हो उठे। उनकी आंखों से अश्रुबिंदु टपकने लगे। एक अश्रुबिंदु से विकेशी गर्भवती हुई, लेकिन शिव के तेज को वह सह नहीं सकी और वह पृथ्वी पर आ गया। उससे एक पुत्र उत्पन्न हुआ। जिसका लालन-पालन यानी स्तनपान पृथ्वी ने कराया।


    मंगल का ज्योतिषीय महत्व
    ज्योतिष में मंगल ग्रह का विशेष महत्व है। किसी भी राशि पर पहुंचने के आठ दिन पूर्व ही यह फल देना आरंभ कर देता है। मुकदमा, झगड़ा आदि उग्र मामलों में मंगल का ही प्रभाव होता है। मनुष्य शरीर में पेट से पीठ तक का भाग तथा नाक, कान, फेफड़े एवं शारीरिक बल इसके अधिकार क्षेत्र के माने गए हैं। यह मुख्यत: 28 से 32 वर्ष की आयु में जातक के जीवन पर अपना शुभ अथवा अशुभ प्रभाव दिखाता है।

  • चाहते हैं कर्ज से छुटकारा तो करें इन देवता की पूजा, ये हैं उपाय, religion hindi news, rashifal news
    +2और स्लाइड देखें

    ग्रह के रूप में परिचय
    पृथ्वी से इसकी दूरी लगभग 6,25,00,000 मील है। आकाशमंडल में भ्रमण करते हुए हर पंद्रहवें साल पृथ्वी के निकट आता है। तब इसकी दूरी केवल 3,46,00,000 मील होती है। इसका व्यास 4115 मील है। सूर्य की परिक्रमा यह 687 दिनों में पूरी करता है। इसकी गति में प्राय: परिवर्तन होता है। जब यह सूर्य के पास होता है तब इसकी रफ्तार तेज हो जाती है। सूर्य, चंद्रमा तथा बृहस्पति तीनों मंगल के मित्र ग्रह हैं। लेकिन बुध, राहु और केतु शत्रु हैं। शुक्र और शनि से यह समभाव रखता है।


    मंगल देवता: एक नजर में
    वर्ण- लाल
    स्वरूप- कृश
    स्वभाव- उग्र, कामी
    गुण- तम
    अधिदेवता- कार्तिकेय
    दिशा- दक्षिण
    वाहन- रथ या मेष

आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

Trending

Top
×