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इस उपाय से मिलती है तेज बुद्धि, दूर होते हैं 5 क्लेश और 6 बुरी आदतें

काम वासना, क्रोध, लालच, नशा, मोह, बुरी लत दूर करने के लिए करें ये काम

यूटिलिटी डेस्क | Last Modified - Feb 15, 2018, 05:00 PM IST

  • इस उपाय से मिलती है तेज बुद्धि, दूर होते हैं 5 क्लेश और 6 बुरी आदतें, religion hindi news, rashifal news

    आज के दौर में जिन लोगों की बुद्धि तेज है, वे ही तेजी से सफलता प्राप्त कर पाते हैं। हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा काफी अधिक हो गई है। ऐसे में जो लोग हालात को समझने में अधिक समय लगाते हैं, वे सफलता प्राप्त नहीं कर पाते हैं, घर-परिवार में सामंजस्य नहीं बना पाते हैं और इस कारण क्लेश-विकार उत्पन्न होते हैं। क्लेश यानी कष्ट, मानसिक तनाव, चिंता और विकार यानी दोष, बुराई। तेज बुद्धि के साथ ही क्लेश और विकार दूर करने के लिए एक सबसे सरल उपाय है नियमित रूप से हनुमान चालीसा का जाप किया जाए।


    ये हैं 5 क्लेश
    अविद्या यानी अज्ञान, अस्मिता यानी अपमान, राग यानी लगाव, द्वेष मन-मुटाव, अभिनिवेश यानी मृत्यु का भय।
    ये हैं 6 विकार यानी बुरी आदतें
    काम यानी वासना, क्रोध यानी गुस्सा, लोभ यानी लालच, मद यानी नशा, मोह यानी आसक्ति या अत्यधिक लगाव, मत्सर यानी बुरी लत।
    ये सभी क्लेश और विकार, हमें लक्ष्य से दूर करते हैं और सही दिशा से भटकाते हैं। इनसे बचने के लिए नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
    यदि हम हर रोज हनुमान चालीसा का पाठ नहीं कर सकते हैं तो सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शनिवार को पाठ कर सकते हैं। यदि सप्ताह में दो दिन भी संभव ना हो सके तो सप्ताह में किसी भी एक दिन पाठ कर सकते हैं। अगर एक दिन भी पूरी हनुमान चालीसा का पाठ नहीं सकते हैं तो किसी एक चौपाई का जाप भी कर लेंगे तो हनुमानजी की कृपा प्राप्त की जा सकती है।
    बुद्धि बढ़ाने के लिए इन पंक्तियों का पाठ करें 108 बार
    बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार।
    बल-बुद्धि बिद्या देह मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

    अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से सिर्फ इन दो पंक्तियों का जाप 108 बार करता है तो उसे तेज बुद्धि प्राप्त हो सकती है। इन पंक्तियों के प्रभाव से हनुमानजी व्यक्ति के सभी क्लेश और विकार भी दूर करते हैं। इन पंक्तियों का यह है कि हे पवन कुमार। मैं खुद को बुद्धि हीन मानता हूं और आपका ध्यान, स्मरण करता हूं। आप मुझे बल-बुद्धि और विद्या प्रदान करें। मेरे सभी कष्टों और दोषों को दूर करने की कृपा कीजिए।
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