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राहु-केतु कैस बने ग्रह, इनकी ये 10 बातें कम लोग ही जानते हैं

कुंडली में राहु-केतु की वजह से ही कालसर्प दोष बनता है।

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 18, 2018, 05:00 PM IST

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    ज्योतिष में 9 ग्रह बताए गए हैं। इन नौ ग्रहों की स्थिति के आधार पर ही व्यक्ति को जीवन में सुख और दुख प्राप्त होता है। नौ ग्रहों में 2 ग्रह ऐसे हैं, जिन्हें छाया ग्रह कहा जाता है। ये ग्रह हैं राहु और केतु। यहां जानिए राहु-केतु से जुड़ी 10 खास बातें…

    1.राहु और केतु सूर्य, चंद्र, मंगल आदि ग्रहों की तरह धरातल वाले ग्रह नहीं हैं, इसलिए इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है।

    2. लोग शनि की तरह से भी भयभीत रहते हैं। दक्षिण भारत में तो लोग राहु काल में कोई काम शुरू नहीं करते हैं।

    3. राहु के संबंध में समुद्र मंथन वाली कथा प्रचलित है।

    4. एक कथा के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप की पुत्री सिंहिका का विवाह दैत्य विप्रचित से हुआ था। विवाह के बाद सिंहिका ने सौ पुत्रों को जन्म दिया, उनमें सबसे बड़ा पुत्र राहु था।

    5. देवासुर संग्राम में राहु ने भी भाग लिया था। समुद्र मंथन के 14 रत्नों में से अमृत भी एक था। जब भगवान विष्णु मोहिनी का रूप धारण कर देवताओं को अमृत पान करा रहे थे, तब राहु भी रूप बदलकर देवताओं के बीच बैठ गया। भगवान विष्णु ने उसे अमृत पान करवा दिया, तभी सूर्य और चंद्र ने राहु को पहचान लिया। तब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से राहु का सिर काट दिया। राहु का सिर और धड़ अलग हो गए, लेकिन अमृत पान की वजह से उसका सिर और धड़ अमर हो गए।

    6. जब राहु का सिर और धड़ अमर हो गया तो सभी देवता उससे डरने लगे। डरे हुए देवता शिवजी के पास पहुंचे और उनसे राहु का संहार करने की प्रार्थना की। तब शिवजी ने श्रेष्ठ चंडिका को मातृकाओं के साथ भेजा। उस समय देवताओं ने राहु के सिर को अपने पास रोके रखा, लेकिन बिना सिर की राहु की देह मातृकाओं के साथ युद्ध कर रही थी।

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    7. राहु की अमर देह किसी भी तरह से परास्त नहीं हो रही थी। तब राहु के सिर ने देवताओं को धड़ के विनाश का तरीका खुद ही बताया। राहु ने देवताओं को बताया कि धड़ को पहले फाड़ दें और उसमें से अमृत निकाल लें। इसके बाद देवी चंडिका और देवताओं ने ऐसा ही किया। जिससे राहु का धड़ नष्ट हो गया। इससे सभी देवता राहु से प्रसन्न हुए और उसे ग्रहत्व प्रदान कर दिया।

    8. ग्रहत्व प्राप्त करने के बाद भी राहु ने सूर्य और चंद्र को क्षमा नहीं किया। पूर्णिमा और अमावस्या पर राहु आज भी सूर्य-चंद्र को ग्रसता है। इसे ही सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कहा जाता है।

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    9. ज्योतिष में राहु और केतु को अन्य ग्रहों के समान महत्व दिया जाता है। ऋषि पाराशर ने राहु को तमो यानी अंधकार बढ़ाने वाला ग्रह बताया है। राहु-केतु दोनों बहुत ही रहस्यमयी ग्रह हैं।

    10. राहु और केतु को राशियों का स्वामी नहीं बनाया गया है। राहु मिथुन राशि में उच्च तथा धनु राशि में नीच का होता है।

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Web Title: Facts About Rahu Ketu In Hindi, Rahu Ketu In Kundli, Astrology In Hindi
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