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पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए पहनी जाती थी ये मणि, आज भी होते हैं इससे कई फायदे

तृणमणि नाम का दुर्लभ उपरत्न भाग्यशाली होने के साथ ही मर्दाना ताकत बढ़ाने के लिए भी पहना जाता है।

यूटिलिटी डेस्क | Last Modified - Mar 07, 2018, 07:38 PM IST

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    तृणमणि नाम का दुर्लभ उपरत्न भाग्यशाली होने के साथ ही मर्दाना ताकत बढ़ाने के लिए भी पहना जाता है। इसे तृणाकर्ष, कर्पूर, कहरूवा, वृक्षनिर्यासमणि या अंग्रेजी में अम्बेर नाम से भी जाना जाता है। यह कहरूवा वनस्पति जाति का उपरत्न है। कई सालाें पहले वनस्पतियों से निकला हुआ गोंद जैसा पदार्थ है जो धीरे-धीेरे पत्थर जैसा कठोर और चमकदार बन जाता है। पत्थर जैसे दूसरे रत्नों की तरह इसमें भी चमक होती है, लेकिन यह वजन में बहुत हल्का होता है। इसमें कर्पूर जैसी गंध आने से इसे कर्पूर भी कहा जाता है।

    ज्योतिषाचार्य पं प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार वराह मिहिर ने अपने ग्रंथ बृहत्संहिता के रत्नाध्याय में रत्नों की उत्पत्ति और उनको पहने के फायदे बताएं हैं। जिसके अनुसार इस प्राकृतिक रत्न को धारण करने से व्यक्ति की पौरूष शक्ति बढ़ती है। चरक संहिता में भी तृणकांतमणि का उल्लेख मिलता है। इसके अलावा 553 ईस्वी के आसपास कुछ ग्रंथों में राजा महाराजाओं का इस मणि को पहनने का उल्लेख मिलता है। ये मणि वीर्य वर्धक है। साथ ही इसे पहनने से हृदय रोगों में भी राहत मिलती है।यदि हृदय रोग नहीं है तो इसे धारण करने से हृदय रोग की आशंका कम हो जाती है। ये रत्न हृदय की अनियंत्रित धड़कनों को कंट्रोल करता है। इससे रक्त, पित्त, प्रदर, खूनी बवासीर और आंतों की कमजोरी भी दूर हो जाती है। इसको पहनने से स्कीन संबंधी रोग ठीक हो जाते हैं और जल्दी ही घाव भरता जाते हैं। पीलिया होने पर भी इससे राहत मिल सकती है। कुछ वैद्य आयुर्वेदिक दवाई बनाने में भी इसका उपयोग करते हैं। वैद्य के निर्देशन में इसका सेवन करने से आंतों और पेट के घाव ठीक हो जाते हैं। तृणमणि का उपयोग आभूषणों में भी होता है।

    कहां मिलता है ये -

    यह ज्यादातर बाल्टिक सागर में, इटली और रोमानिया में मिलता है। इसके अलावा डेनमार्क, स्वीडन और सिसली में भी ये पाया जाता है।

    आगे पढ़ें कैसे पहनें ये रत्न और किस तरह होती है इसकी पहचान -

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    कैसे पहने इसे -

    वैसे तो इसे सीधे हाथ की तर्जनी यानी पहली उंगली में पंचधातु (सोना, चांदी, तांबा, कांसा और लाेहा) में पहना जाता है, लेकिन आप अपनी कुंडली के अनुसार किसी ज्योतिषी से सलाह लेकर पहनें ताे इसका ज्यादा अच्छा फल मिलेगा।

    कैसे होती है इसकी पहचान -

    असली तृणमणि या कहरूवा लाल, पीले और सफेद रंग का होता है। इसे जब हथेलियों के बीच में रखकर रगड़ा जाता है तो हल्की-हल्की कपूर जैसी गंध आती है। इसे बाल या रेशे पर स्पर्श करवाया जाता है तो यह चुंबक की भांति उन्हें अपनी ओर खींच लेता है। यदि इसे आग के पास रखा जाए तो ये मोम की तरह गंध छोड़ता हुआ जलने लगता है।

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