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भरत राजगादी पर क्यों नहीं बैठे?

राजा दशरथ के चार पुत्रों में दशरथ की प्रिय रानी कैकयी से जन्मे थे।

जीवनमंत्र डेस्क | Last Modified - Mar 12, 2018, 07:02 PM IST

भरत राजगादी पर क्यों नहीं बैठे?
राजा दशरथ के चार पुत्रों में भरत दशरथ की प्रिय रानी कैकेयी से जन्मे थे। श्रीरामकथा में सारा विवाद इन्हीं को लेकर हुआ। दशरथ ने जब राम को राजा बनाने की तैयारी की तब कैकेयी भरत को राज्य देने के लिए अड़ गई। पहले दिए वचनों से बंधे होने के कारण दशरथ ने राम को वनवास दिया आैर भरत के लिए राज्य की सहमति दी। इसी के साथ दशरथ के प्राणों का अंत हो गया। राम व लक्ष्मण सीता के साथ वन चले गए। इस पूरे घटनाक्रम के समय भरत अपने छोटे भाई शत्रुघ्न के साथ ननिहाल में थे।
लौटने पर जब उन्हें विवाद का कारण पता चला तो वे बहुत दुखी हुए। उन्होंने राम को वन से वापस अयोध्या लाने की बहुत कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर वे राम की खड़ाऊं ही ले आए और उसे राजगद्दी पर विराजित कर राजकाज चलाया। राम के वनवास की अवधि 14 वर्ष थी। उस दौरान भरत भी अयोध्या के पास नंदीग्राम में तपस्वी जीवन जीते रहे। भरत का चरित्र राज्य के बजाए भातृ प्रेम और त्याग का उदाहरण है। उन्होंने राजा बनाए जाने के बावजूद इसलिए राज्य नहीं लिया,क्योंकि वे परिवार में धन के लिए विवाद का कारण नहीं बनना चाहते थे। भरत का त्याग उन्हें यशस्वी बना गया।
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