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चोरी के आरोप के कारण ससुर से ही करना पड़ा था श्रीकृष्ण को युद्ध, ऐसी है अनोखी कहानी

रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम की मुलाकात जब हनुमान से हुई तो उसके बाद उनकी और भी कई दिव्य शख्सियतों से मुलाकात हुई।

जीवनमंत्र डेस्क | Last Modified - Dec 16, 2017, 12:13 PM IST

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    रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम की मुलाकात जब हनुमान से हुई तो उसके बाद उनकी और भी कई दिव्य शख्सियतों से मुलाकात हुई। भगवान राम की हनुमान समेत बहुत से अलौकिक शख्सियतों से मुलाकात हुई थी। उन्हीं में से एक जामवंत थे। कहा जाता है कि एक रीछ की आकृति वाले जामवंत एक दिव्य पुरुष थे, जिन्हें ख्रुद ब्रह्मा ने इस धरती पर भेजा था। यह बात कई प्राचीन ग्रंथों में कही गई है कि पौराणिक काल में बहुत सी ऐसी नस्लें थीं जो मानव से भी कहीं ज्यादा बुद्धिमान और विकसित थीं। जामवंत उसी नस्ल के सदस्य जाे रीछ के समान थे। इनकी उम्र भी काफी होती थी। इसलिए जामवंत तीनों युगों में मौजूद थे। वह वामन, राम और कृष्ण तीनों के काल में थे और तीनों ही युगों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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    श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण पर एक बार चोरी का आरोप लगा उन पर एक स्यमंतकामिनी नामक मणि चुराने का आरोप लगाया गया जो कि गलत था। इसलिए श्रीकृष्ण मणि की तलाश में जब निकले तो उन्हें पता चला कि यह मणि जामवंत नाम के उनके पूर्व जन्म के भक्त के पास है। श्रीकृष्ण जब मणि लेने पहुंचे तो उन्होंने भगवान को नहीं पहचाना। इसलिए जामवंत व श्रीकृष्ण के बीच लगभग 28 दिनों तक भयंकर युद्ध चला था। इस युद्ध के अंतिम दिन जामवंत को इस बात का एहसास हुआ कि श्रीकृष्ण कोई और नहीं, बल्कि स्वयं उनके प्रभु राम के ही अवतार हैं।

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    श्रीकृष्ण की असलियत को जानते ही उन्होंने अपनी हार स्वीकारते हुए युद्ध को रोक दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी पुत्री जांबवंती का विवाह श्रीकृष्ण से करवा दिया।
    रामायण काल में महेंद्र पर्वत, जहां से हनुमान ने लंका की ओर छलांग मारी थी, पर खड़े होकर जामवंत ने यह स्वीकार किया था कि हनुमान की तरह वह भी इस विशाल सागर को पार सकते थे, लेकिन विष्णु के वामन अवतार के दौरान जब वामन ने तीन कदमों में ही समस्त ब्रह्मांड माप लिया था तब वह वामन के लिए नगाड़ा बजा रहे थे, उस समय वह घायल हो गए थे। समुद्र मंथन के दौरान क्षीर सागर में से विशाल्यकर्णी पौधा जिसका सेवन मौत को टाल सकता था, निकला था, तो उस समय भी जामवंत वहां मौजूद थे, क्योंकि आगे चलकर जब राम-रावण के युद्ध में लक्ष्मण, गंभीर रूप से घायल हुए थे तब भी जामवंत ने ही उन्हें संजीवनी बूटी का रहस्य बताया था।


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    मध्यप्रदेश की रतलाम तहसील के पास जामथुन नाम का एक गांव है। इस गांव में जामवंत और उनके समकालीन लोगों के होने के प्रमाण प्राप्त किए गए हैं। इस गांव को जामवंत या जामवंत नगरी के नाम से भी जाना जाता है। खुदाई के दौरान इस स्थान से प्राचीन काल से जुड़ी बहुत सी वस्तुएं हासिल हुई हैं। गुजरात के पोरबंदर से करीब 17 किलोमीटर दूर राजकोट-पोरबंदर हाइवे पर जामवंत की गुफा भी मौजूद है। इस गुफा के भीतर वह स्थान भी है जहां जामवंत और कृष्ण के बीच हीरे के लिए युद्ध हुआ था।

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