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प्लानिंग को सफल बनाने के लिए हमेशा याद रखना चाहिए ये 1 बात

किताबों में अक्सर हम जिन महान लोगों का जिक्र पढ़ते हैं, उन्हें महापुरुष कहा जाता है। महापुरुष अलग नहीं होते हैं

जीवनमंत्र डेस्क | Last Modified - Dec 12, 2017, 02:51 PM IST

  • प्लानिंग को सफल बनाने के लिए हमेशा याद रखना चाहिए ये 1 बात

    किताबों में अक्सर हम जिन महान लोगों का जिक्र पढ़ते हैं, उन्हें महापुरुष कहा जाता है। महापुरुष अलग नहीं होते हैं, वे दरअसल हमारे ही बीच के वे लोग होते हैं। जिनके विचार वाणी, भाव व बुद्धि में विलक्षण गुण होते हैं। अपने कर्मों के कारण पूजनीय माने जाते हैं। वे जैसा सोचते हैं, जैसा कहते हैं, वैसा ही करते हैं। इसलिए उनके जीवन की घटनाएं लोगों के लिए प्रेरणा बन जाती है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं शिवाजी से जुड़ी एक कहानी जो आपके निर्णय लेने का तरीका बदल सकती है...

    शिवाजी को बुढ़िया की सीख
    बात उन दिनों की है, जिन दिनों छत्रपति शिवाजी मुगलों के विरुद्ध छापा मार युद्ध लड़ रहे थे। एक दिन रात को वे थके- मांदे एक वनवासी बुढ़िया की झोंपड़ी में पहुंचे। उन्होंने कुछ खाने के लिए मांगा। बुढ़िया के घर में केवल चावल थे, सो उसने प्रेम पूर्वक भात पकाया और उसे ही परोस दिया। शिवाजी बहुत भूखे थे, सो झट से भात खाने की आतुरता में उंगलियां जला बैठे। हाथ की जलन शांत करने के लिए फूंकने लगे। यह देख बुढ़िया ने उनके चेहरे की ओर गौर से देखा और बोली-सिपाही तेरी सूरत शिवाजी जैसी लगती है और साथ ही यह भी लगता है कि तू उसी की तरह मूर्ख है।

    शिवाजी स्तब्ध रह गए। उन्होंने बुढ़िया से पूछा- भला शिवाजी की मूर्खता तो बताओ और साथ ही मेरी भी। बुढ़िया ने उत्तर दिया- तूने किनारे- किनारे से थोड़ा- थोड़ा ठंडा भात खाने की अपेक्षा बीच के सारे भात में हाथ डाला और उंगलियां जला लीं। यही मूर्खता शिवाजी करता है। वह दूर किनारों पर बसे छोटे- छोटे किलों को आसानी से जीतते हुए शक्ति बढ़ाने की अपेक्षा बड़े किलों पर धावा बोलता है और हार जाता है।

    शिवाजी को अपनी रणनीति की विफलता का कारण पता चल गया। उन्होंने बुढ़िया की सीख मानी और पहले छोटे लक्ष्य बनाए और उन्हें पूरा करने की रीति- नीति अपनाई। इस प्रकार उनकी शक्ति बढ़ी और अंततः वे बड़ी विजय पाने में समर्थ हुए। शुभारंभ हमेशा छोटे- छोटे संकल्पों से होता है, तभी बड़े संकल्पों को पूरा करने का आत्मविश्वास जागृत होता है।

    ज्ञान- इस कहानी से यह ज्ञान मिलता है कि पहले छोटे लक्ष्य बनाएं और फिर बड़े लक्ष्य के बारे में सोचें। ऐसा करने से सफलता जरूर मिलेगी, क्योंकि छोटा लक्ष्य प्राप्त करने पर बड़े लक्ष्य को पाने की ऊर्जा दोगुनी हो जाती है।

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Web Title: Short Inspirational Story
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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