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प्राचीन भारत में भी होता था परमाणु हथियारों का उपयोग, इस तरह मिलता है पुराणों में ज़िक्र

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार पुराने समय के हथियारों में मंत्रों से पैदा की गई शक्तियां व क्षमता इतनी अनोखी थी

जीवनमंत्र डेस्क | Last Modified - Jul 12, 2018, 05:00 PM IST

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    रिलिजन डेस्क.हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार पुराने समय के हथियारों में मंत्रों से पैदा की गई शक्तियां व क्षमता इतनी अनोखी थी कि इनके सामने आज के समय में तैयार किए जा रहे युद्ध के साजो-समान की ताकत व तकनीक भी छोटी नजर आती है। धर्म की अधर्म व सत्य की असत्य पर जीत के प्रतीक धर्मयुद्धों में न केवल शूरवीरों द्वारा अपनाई गई मर्यादा और नीतियां निर्णायक बनीं, बल्कि कई ऐसे घातक अस्त्र-शस्त्र भी उपयोग किए गए, जो खासतौर पर मंत्र शक्तियों से साधे जाते थे और उनमें समाई अचूक शक्तियां दुश्मन खेमे के लिए विध्वंसक होती थीं।

    प्राचीन काल में युद्ध के दौरान उपयोग किए जाने वाले हथियार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते थे। पहला अस्त्र और दूसरा शस्त्र।


    अस्त्र-जिनको मंत्रों से साधकर दूर से ही फेंका जाता था। इनके जरिए अग्नि, विद्युत, गैस या यांत्रिक उपायों से शत्रु पर वार किया जाता था।

    आगे की स्लाइड् में पढ़ें- कौन से हैं प्राचीन अस्त्र....

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    1. ब्रह्मास्त्र
    यह ब्रह्मदेव का अस्त्र माना जाता है। यह सबसे घातक व मारक अस्त्र था, जो दुश्मन को तबाह करके ही छोड़ता था। इसकी काट केवल दूसरे ब्रह्मास्त्र से ही संभव थी। आज के दौर के हथियारों से तुलना की जाए तो ब्रह्मास्त्र की ताकत कई परमाणु बमों से भी कहीं ज्यादा थी। रामायण के मुताबिक मेघनाद ने हनुमानजी पर भी ब्रह्मास्त्र चलाया, लेकिन खुद रूद्र रूप हनुमान ने उसका सम्मान कर समर्पण कर दिया।

    2. पाशुपत अस्त्र
    यह शिव का अस्त्र माना जाता है। इस बाण में मंत्र से पैदा शक्ति व ऊर्जा एक ही बार में पूरी दुनिया का विनाश कर सकती थी। माना जाता है कि कुरुक्षेत्र में युद्ध के दौरान यह अस्त्र केवल अर्जुन के पास ही था।

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    3. नारायणास्त्र
    नारायणास्त्र वैष्णव या विष्णु अस्त्र के नाम से भी जाना जाता है। यह पाशुपत की तरह ही भयंकर अस्त्र था। यहां तक कि माना जाता है कि एक बार नारायणास्त्र छोड़ने देने पर पूरी दुनिया में इसकी किसी दूसरे अस्त्र से कोई काट नहीं थी। बस, इससे बचने के लिए एक ही उपाय यह था कि शत्रु हथियार डालकर समर्पण कर धरती पर खड़ा हो जाए। अन्यथा यह अस्त्र लक्ष्य के लिए अचूक होता था।

    4. आग्नेय अस्त्र
    यह मंत्र शक्ति से तैयार ऐसा बाण था, जो धमाके के साथ अग्नि बरसाना शुरू कर देता था और साधे लक्ष्य को चंद पलों में जलाकर राख कर देता था। इसकी काट पर्जन्य बाण के जरिए संभव थी।

    5. पर्जन्य अस्त्र
    मंत्र शक्ति से सधे इस बाण से बिना मौसम भी बादल पैदा होते, भारी बारिश होती, बिजली कड़कती और हवाई बवंडर चलते थे। खासतौर पर यह आग्नेय बाण का तोड़ था।

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    6. पन्नग अस्त्र
    मंत्र बोलकर इस बाण के जरिए सांप पैदा किए जाते थे, जो तय लक्ष्य को जहर के प्रभाव से निश्चेत कर देते थे। इसकी काट गरुड़ अस्त्र से ही संभव थी। रामायण में भगवान राम व लक्ष्मण भी इसी के रूप नागपाश के प्रभाव से मूर्छित हुए थे और गरुड़ देव ने आकर इनसे मुक्ति दिलाई थी।

    7. गरुड़ अस्त्र
    इस अचूक बाण में मंत्रों के आवाहन से गरुड़ पैदा होते थे, जो खासतौर पर पन्नग अस्त्र या नाग पाश से पैदा सांपों को मार देते थे या उसमें जकडें व्यक्ति को मुक्त करते थे।


    8. वायव्य अस्त्र
    मंत्र शक्ति से यह बाण इतनी तेज हवा व भयानक तूफान पैदा करता कि चारों ओर अंधेरा हो जाता था। इसी तरह एकाग्नि व ब्रह्मशिरा जैसे अलग-अलग देवी-देवताओं की शक्तियों से सराबोर मांत्रिक अस्त्रों का भी उपयोग किया जाता था।

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    शस्त्र-जिनसे दुश्मन से आमने- सामने युद्ध लड़ा जाता था।
    1. गदा
    छाती तक लंबाई व पतले हत्थे वाले इस शस्त्र का निचला भाग भारी होता था। इसका पूरा वजन तकरीबन 20 मन होता था। महाबली योद्धा हर हाथ में दो-दो गदा तक उठाकर युद्ध करते थे। इनमें बलराम, भीम व दुर्योधन भी खासतौर पर शामिल थे।

    2.असि
    तलवार का ही एक नाम। यह धातु की बना टेढ़पन लिया हुआ धारदार शस्त्र।

    3. त्रिशूल
    निचला हिस्सा पतला और ऊपरी हिस्से पर तीन शूल होते हैं।

    4. वज्र
    ऊपरी तीन हिस्से टेढ़े-मेढ़े, बीच का भाग पतला व हत्था भारी होता है।

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