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ये थे भीष्म के 2 भाई, बहुत कम लोग जानते हैं इनके बारे में

महाभारत के अनुसार, भरतवंशी राजा शांतनु का पहला विवाह देवनदी गंगा से हुआ था, जिससे भीष्म का जन्म हुआ।

जीवन मंत्र डेस्क | Last Modified - Nov 14, 2017, 05:00 PM IST

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    महाभारत के अनुसार, भरतवंशी राजा शांतनु का पहला विवाह देवनदी गंगा से हुआ था, जिससे भीष्म का जन्म हुआ। गंगा के जाने के बाद राजा शांतनु ने सत्यवती से दूसरा विवाह किया। सत्यवती के दो पुत्र हुए- चित्रांगद और विचित्रवीर्य। ये दोनों ही भीष्म के सौतेले भाई थे।

    ऐसे हुई चित्रांगद की मृत्यु

    महाराज शांतनु की मृत्यु के बाद भीष्म ने चित्रांगद को राजा बनाया। उसने अपने पराक्रम से सभी राजाओं को पराजित कर दिया। जब गंधर्वों के राजा चित्रांगद ने यह देखा तो उसने हस्तिनापुर पर हमला कर दिया। गंधर्वों के राजा चित्रांगद और हस्तिनापुर के राजा चित्रांगद में 3 साल तक युद्ध होता रहा। गंधर्वों का राजा चित्रांगद बहुत मायावी था। उसने अपनी माया के बल पर भीष्म के भाई चित्रांगद का वध कर दिया।

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    क्षय रोग से हुई विचित्रवीर्य की मृत्यु

    चित्रांगद की मृत्यु के बाद भीष्म ने सत्यवती के दूसरे पुत्र विचित्रवीर्य को हस्तिनापुर का राजा बनाया। युवा होने पर भीष्म ने विचित्रवीर्य का विवाह काशी की राजकुमारियों अंबिका व अंबालिका से करवा दिया। विवाह के 7 साल बाद विचित्रवीर्य को क्षय (टीबी) रोग हो गया। बहुत उपचार करने के बाद भी विचित्रवीर्य की मृत्यु हो गई।
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    कैसे हुई धृतराष्ट्र, गांधारी व कुंती की मृत्यु?

    महाभारत के अनुसार, युद्ध के बाद धृतराष्ट्र व गांधारी पांडवों के साथ 15 साल तक रहे। इसके बाद वे कुंती, विदुर व संजय के साथ वन में तपस्या करने चले गए। एक दिन जब वे गंगा स्नान कर आश्रम आ रहे थे, तभी वन में भयंकर आग लग गई। दुर्बलता के कारण धृतराष्ट्र, गांधारी व कुंती भागने में असमर्थ थे। इसलिए उन्होंने उसी अग्नि में प्राण त्यागने का विचार किया और वहीं एकाग्रचित्त होकर बैठ गए। इस प्रकार धृतराष्ट्र, गांधारी व कुंती ने अपने प्राणों का त्याग कर दिया।
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    सत्यवती, अंबिका व अंबालिका

    महाभारत के अनुसार, पांडु की मौत से सत्यवती को बहुत दुख हुआ। सत्यवती को दुखी देख महर्षि वेदव्यास ने उनसे कहा कि- अब बड़े बुरे दिन आ रहे हैं। पाप बढ़ने से लोगों में छल-कपट का बोलबाला हो रहा है। कौरवों के अन्याय से बड़ा भारी संहार होगा। आप अब वन में जाकर तपस्या कीजिए। अपनी आंखों से अपने वंश का नाश देखना उचित नहीं है। सत्यवती ने ऐसा ही किया और अपने साथ अंबिका व अंबालिका को लेकर वन में चली गई। वन में घोर तपस्या करके तीनों ने शरीर का त्याग कर दिया।

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    शकुनि व उलूक

    युद्ध में सहदेव ने वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए शकुनि और उलूक (शकुनि का पुत्र) को घायल कर दिया और देखते ही देखते उलूक का वध दिया। अपने पुत्र का शव देखकर शकुनि को बहुत दु:ख हुआ और वह युद्ध छोड़कर भागने लगा। सहदेव ने शकुनि का पीछा किया और उसे पकड़ लिया। घायल होने पर भी शकुनि ने बहुत समय तक सहदेव से युद्ध किया और अंत में सहदेव के हाथों मारा गया।

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    धृष्टद्युम्न व शिखंडी

    युद्ध समाप्त होने के बाद जब पांडवों के शिविर में सभी सो रहे थे। तभी अश्वत्थामा उनके शिविर में घुस गए और सबसे पहले द्रौपदी के भाई धृष्टद्युम्न को पीट-पीट कर मार दिया। इसके बाद अश्वत्थामा ने उत्तमौजा, युधामन्यु, शिखंडी आदि वीरों का भी वध कर दिया। तब अश्वत्थामा को रोकने के लिए द्रौपदी के पुत्र आए, लेकिन उसने उनका भी वध कर दिया।

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    राजा शल्य

    राजा शल्य नकुल व सहदेव की माता माद्री के भाई थे। यानी वे पांडवों के मामा थे। युद्ध में उन्होंने कौरवों का साथ दिया था। कर्ण की मृत्यु के बाद राजा शल्य को सेनापति बनाया गया। युद्ध में महाराज शल्य ने सर्वतोभद्र नामक व्यूह बनाकर पांडवों पर आक्रमण कर दिया। मद्रराज के कहने पर उनका सारथि रथ को युधिष्ठिर की ओर ले गया। युधिष्ठिर और मद्रराज शल्य के बीच भयंकर युद्ध हुआ और अंत में युधिष्ठिर ने शल्य का वध कर दिया। इसके बाद पांडव वीरों ने शल्य की सेना का भी संहार कर दिया।

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