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इन 9 लोगों की बात तुरंत मान लें, वरना हो सकते हैं बर्बाद

श्रीरामचरित मानस की बातों का पालन करने पर हमारी सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 18, 2018, 05:00 PM IST

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    हमारे आसपास रहने वाले कई लोग ऐसे हैं, जिनकी बात टालने पर या उनका विरोध करने पर हमारा नुकसान होना तय है। श्रीरामचरित मानस में नौ ऐसे लोग बताए गए हैं, जिनसे कभी भी विरोध नहीं करना चाहिए। यह नौ लोग मारीच और रावण के संवाद में बताए गए हैं। यहां जानिए पूरा प्रसंग क्या था।


    ये था प्रसंग
    जब रावण सीता का हरण करने के उद्देश्य से मारीच के पास पहुंचा तो मारीच से लंकापति को बहुत प्रकार से समझाने का प्रयास किया कि वह श्रीराम से बैर न करें। वे स्वयं नारायण के अवतार हैं। मारीच की ये सब बातें सुनकर रावण क्रोधित हो गया स्वयं के बल और शक्तियों का गुणगान करने लगा। जब मारीच को समझ आ गया कि रावण को समझाना असंभव है और सीता हरण के लिए उसकी मदद करने में ही भलाई है। मारीच ने सोचा कि-
    तब मारीच हृदयँ अनुमाना। नवहि बिरोधें नहिं कल्याना।।
    सस्त्री मर्मी प्रभु सठ धनी। बैद बंदि कबि भानस गुनी।।

    गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस में लिखे इस दोहे में मारीच की सोच से बताया गया है कि हमें किन नौ लोगों की बातों को तुरंत मान लेना चाहिए। अन्यथा हमारे प्राणों का संकट खड़ा हो सकता है।
    इस दोहे के अनुसार पहला व्यक्ति है शस्त्रधारी-अगर कोई शस्त्रधारी हमें किसी काम को करने के लिए कह रहा है तो हमारी भलाई इसी में है कि हम उसका काम कर दें। अन्यथा परिणाम भयंकर हो सकते हैं। शस्त्रधारी की बात टालने पर उसे क्रोध आ सकता है और वह हम पर प्रहार भी कर सकता है। इस स्थिति से बचने के लिए हमें उसकी सभी बातें मान लेनी चाहिए।
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    दूसरा व्यक्ति है मर्मी यानी भेद जानने वाला

    अगर कोई व्यक्ति हमारे सभी भेद यानी राज जानता है तो उसकी बात मानने से मना करना बहुत ही हानिकारक हो सकता है। भेद जानने वाला व्यक्ति रूठ जाए तो वह हमारे राज समाज में सभी को बता सकता है। राज की बातें सार्वजनिक होने पर कई प्रकार के विपरीत परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। इसीलिए कहा गया है कि हमराज को किसी भी तरह प्रसन्न ही रखना चाहिए।

    तीसरा व्यक्ति है स्वामी, मालिक या बॉस

    आज के दौर में एक वाक्य बहुत चर्चित है बॉस इस ऑलवेज राइट। ये बात सच भी है। यदि आप बॉस से किसी भी प्रकार का वाद-विवाद करेंगे तो यह आपकी नौकरी के लिए अच्छा नहीं है। बॉस की बात को टालना आपके वेतन पर बुरा असर डाल सकता है। इसीलिए स्वामी या मालिक जो भी बात कहे उसे तुरंत मान लेना चाहिए। कभी-कभी बॉस गलत निर्णय भी ले लेते हैं, लेकिन हमें यह बात वाद-विवाद करके नहीं बल्कि काम करके सिद्ध करनी चाहिए कि बॉस का यह निर्णय गलत है।

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    चौथा व्यक्ति है सठ यानी मूर्ख

    यदि कोई व्यक्ति मूर्ख है और वह कुछ कह रहा है तो उसे तुरंत मान लें। अन्यथा वह आपका समय बर्बाद करेगा, बेकार के तर्क-वितर्क करेगा, इन बातों को सुनकर आप स्वयं ही क्रोधित भी होंगे, खुद के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाएंगे। इन सब बातों से बचने के लिए मूर्ख व्यक्ति की बात तुरंत मान लेना चाहिए। ऐसा करने पर मूर्ख भी प्रसन्न हो जाएगा और फालतू की बहस से आपका समय भी बच जाएगा।

    पांचवां व्यक्ति है धनवान

    धन ही सब कुछ नहीं है, लेकिन धन बहुत कुछ कर सकता है। जहां धन की आवश्यकता है, वहां धन का काम धन ही कर सकता है। अत: कभी भी धनी व्यक्ति का अनादर नहीं करना चाहिए, अन्यथा जब हमें धन की आवश्यकता होगी तो उससे मदद प्राप्त नहीं हो पाएगी। धनी व्यक्ति की बात भी तुरंत ही मान लेने में हमारी भलाई होती है। धनी इंसान अपने धन से कई प्रकार के कार्यों में हमारा सहयोग कर सकता है।

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    छठां व्यक्ति है वैद्य

    वैद्य यानी डॉक्टर को भगवान का ही एक रूप माना जाता है। जब स्वास्थ्य बिगड़ता है तो वैद्य ही दवाइयों और नुस्खों से हमारा इलाज करता है। वैद्य यदि कोई सलाह दे तो उसका अक्षरश: पालन करना चाहिए। वैद्य की बातों को टालने पर हम स्वयं के प्राणों के साथ ही खिलवाड़ करते हैं। ये तो स्वास्थ्य संबंधी बात है, लेकिन सामान्य रूप से भी वैद्य कोई बात या काम बताता है तो उसे तुरंत मान लेना चाहिए, यदि हम उसकी बात नहीं मानेंगे तो वह रूठ सकता है। ऐसे में जब हमें स्वास्थ्य संबंधी कारणों से वैद्य की जरुरत होगी तब रूठा हुआ वैद्य मदद करने से मना कर सकता है।

    सातवां व्यक्ति है भाट

    भाट वे लोग होते हैं जो प्राचीन काल के समय शाही दरबार में अपने राजा की प्रशंसा करते हुए कविताएं लिखते थे और गाते थे। इस कारण वे राजा के प्रिय होते थे। रावण और मारीच के काल में भाट का काफी महत्व हुआ करता था। इस कारण इनकी बात को भी नजरअंदाज करना हानिकारक ही होता था, क्योंकि वे राजा के करीबी होते थे और अपने विद्रोही को बलपूर्वक सजा भी दिलवा सकते थे।

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    आठवां व्यक्ति है कवि

    यदि हम किसी कवि का अनादर करेंगे या उससे विद्रोह करेंगे तो वह कविताओं के माध्यम से अपने विद्रोहियों की शाख को खराब कर सकता है। कविताएं बहुत प्रभावी होती हैं और इनसे बहुत ही जल्दी किसी भी व्यक्ति की शाख बन भी जाती है और खराब भी हो जाती है। अत: कवि की बात भी तुरंत मान लेनी चाहिए।

    अंतिम नवां व्यक्ति है रसोइया

    अगर हमारे घर में खाना बनाने वाला रसोइया है तो उसकी बातों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि रसोइया रूठ जाएगा तो वह खाने में कुछ भी मिलाकर हमारी सेहत बिगाड़ सकता है। अत: रसोइयों की बात को भी तुरंत मान लेना चाहिए।

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