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जब ऐसे लोग नमस्ते करें तो सावधान हो जाएं, वरना हो सकता है नुकसान

श्रीरामचरित मानस में कई ऐसी बातें बताई गई हैं, जिनका पालन करने पर हम बहुत सी परेशानियों से बच सकतें हैं।

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Feb 12, 2018, 05:00 PM IST

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    नवनि नीच कै अति दुखदाई यानी नीच लोगों का नमन, नीच लोगों का झुकना, नीच लाेगों का नमस्कार करना दुखदाई होता है। जब भी कोई बुरे स्वभाव वाला व्यक्ति हमें नमस्ते करता है तो हमें सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि नीच लोग जब भी हमारे सामने झुकते हैं तो इसका मतलब यही है कि वे हमसे कुछ चाहते हैं। इन लोगों के इच्छा पूरी करने पर हमें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ये बात गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस में इस संबंध में रावण और मारीच के एक प्रसंग में बताई गई है। यहां जानिए पूरा प्रसंग और हमें किन लोगों को नमस्ते नहीं करना चाहिए…


    जब मारीच के सामने झुका रावण
    जब रावण सीता का हरण करने के लिए लंका से निकलता है तो सबसे पहले वह अपने मामा मारीच के पास पहुंचता है और उसे नमस्कार करता है। मारीच रावण को झुका देखकर समझ जाता है कि अब भविष्य में कोई संकट आने वाला है।
    श्रीरामचरित मानस में लिखा है कि-
    नवनि नीच कै अति दुखदाई। जिमि अंकुस धनु उरग बिलाई।।
    भयदायक खल कै प्रिय बानी। जिमि अकाल के कुसुम भवानी।।

    दोहे का अर्थ- रावण को इस प्रकार झुके हुए देखकर मारीच सोचता है कि किसी नीच व्यक्ति का नमन करना भी दुखदाई होता है। मारीच रावण का मामा था, लेकिन रावण राक्षसराज और अभिमानी था। वह बिना कारण किसी के सामने झुक नहीं सकता था। मारीच ये बात जानता था और उसका झुकना किसी भयंकर परेशानी का संकेत था। तब भयभीत होकर मारीच ने रावण को प्रणाम किया।
    मारीच सोचता है कि जिस प्रकार कोई धनुष झुकता है तो वह किसी के लिए मृत्यु रूपी बाण छोड़ता है। जैसे कोई सांप झुकता है तो वह डंसने के लिए झुकता है। जैसे कोई बिल्ली झुकती है तो वह अपने शिकार पर झपटने के लिए झुकती है। ठीक इसी प्रकार रावण भी मारीच के सामने झुका था। किसी नीच व्यक्ति की मीठी वाणी भी बहुत दुखदायी होती है, यह ठीक वैसा ही है जैसे बिना मौसम का कोई फल। मारीच अब समझ चुका था कि भविष्य में उसके साथ कुछ बुरा होने वाला है।
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    यह था प्रसंग
    श्रीरामचरित मानस के अनुसार, लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक और कान काट दिए जाते हैं। इस अपमान का बदला लेने के लिए शूर्पणखा खर और दूषण नाम के राक्षसों के पास जाती है और राम-लक्ष्मण से बदला लेने के लिए उकसाती है। खर-दूषण भी शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए राम और लक्ष्मण पर आक्रमण कर देते हैं, लेकिन उस युद्ध में सभी राक्षस मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। तब शूर्पणखा अपने भाई रावण को पूरा प्रसंग बताती है और सीता का हरण करने की बात कहती है। रावण भी अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए तैयार हो जाता है।

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