Home » Jeevan Mantra »Jeene Ki Rah »Dharm » Motivational Story About Problems In Hindi, How To Get Happiness In Life

स्त्री हो या पुरुष, आपकी सारी परेशानियां चुटकियों में ऐसे हो जाएंगी खत्म

काम का बोझ परेशान करता है तो ये कहानी आपके काम आएगी

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 06, 2018, 05:00 PM IST

  • स्त्री हो या पुरुष, आपकी सारी परेशानियां चुटकियों में ऐसे हो जाएंगी खत्म
    +1और स्लाइड देखें

    अगर स्त्री हो या पुरुष, नौकरी करते हैं या कोई व्यापार करते हैं और काम में आने वाली बाधाओं से परेशान हैं तो यहां जानिए एक ऐसे राजा की कहानी जो अपने राज-पाठ से परेशान था, लेकिन उसके गुरु ने एक तरकीब से राजा की सारी परेशानियां खत्म कर दीं। जानिए राजा की कहानी, कैसे उसकी सभी समस्याएं खत्म हो गई।

    ये है कहानी

    बहुत समय पहले की बात है एक राजा था। उसे राजा बने लगभग दस साल हो चुके थे। पहले कुछ साल तो उसे राज्य संभालने में कोई परेशानी नहीं आई। फिर एक बार अकाल पड़ा। उस साल लगान न के बराबर आया। राजा को यही चिंता लगी रहती कि खर्चा कैसे घटाया जाए ताकि काम चल सके। उसके बाद यही आशंका रहने लगी कि कहीं इस बार भी अकाल न पड़ जाए।
    उसे पड़ोसी राजाओं का भी डर रहने लगा कि कहीं हमला न कर दें। एक बार उसने कुछ मंत्रियों को उसके खिलाफ षडयंत्र रचते भी पकड़ा था। राजा को चिंता के कारण नींद नहीं आती। भूख भी कम लगती। शाही मेज पर सैकड़ों पकवान परोसे जाते, लेकिन वह दो-तीन कौर से अधिक नहीं खा पाता। राजा अपने शाही बाग के माली को देखता था। जो बड़े स्वाद से प्याज व चटनी के साथ सात-आठ मोटी-मोटी रोटियां खा जाता था।

    और राजा ने कर ली गुरु के यहां नौकरी

    जब राजा के गुरु ये देखा तो उन्होंने राजा से कहा कि अगर तुमको नौकरी ही करनी है तो मेरे यहां नौकरी कर लो। मैं तो ठहरा साधू मैं आश्रम में ही रहूंगा, लेकिन इस राज्य को चलाने के लिए मुझे एक नौकर चाहिए। तुम पहले की तरह ही महल में रहोगे। गद्दी पर बैठोगे और शासन चलाओगे, यही तुम्हारी नौकरी होगी। राजा ने स्वीकार कर लिया और वह अपने काम को नौकरी की तरह करने लगा। फर्क कुछ नहीं था काम वही था, लेकिन अब वह जिम्मेदारियों और चिंता से लदा नहीं था।

  • स्त्री हो या पुरुष, आपकी सारी परेशानियां चुटकियों में ऐसे हो जाएंगी खत्म
    +1और स्लाइड देखें

    ऐसे समझाया गुरु ने राजा को

    कुछ महीनों बाद उसके गुरु आए। उन्होंने राजा से पूछा कहो तुम्हारी भूख और नींद का क्या हाल है। राजा ने कहा- मालिक अब खूब भूख लगती है और आराम से सोता हूं। गुरु ने समझाया देखो सब पहले जैसा ही है, लेकिन पहले तुमने जिस काम को बोझ की गठरी समझ रखा था। अब सिर्फ उसे अपना कर्तव्य समझ कर रहे हो। हमें अपना जीवन कर्तव्य करने के लिए मिला है। किसी चीज को जागीर समझकर अपने ऊपर बोझ लादने के लिए नहीं।

    ये है आपके काम की सीख

    इस कहानी की यही सीख है कि काम कोई भी हो, चिंता उसे और ज्यादा कठिन बना देती है। जो भी काम करें उसे अपना कर्तव्य समझकर ही करें। ये नहीं भूलना चाहिए कि हम न कुछ लेकर आए थे और न कुछ लेकर जाएंगे।

आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

Trending

Top
×