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महाभारत से जानिए, कैसा होना चाहिए साधु-संत का व्यवहार

हिंदू धर्म में साधु-संतों व संन्यासियों का विशेष आदर किया जाता है।

जीवन मंत्र डेस्क | Last Modified - Dec 30, 2017, 05:00 PM IST

महाभारत से जानिए, कैसा होना चाहिए साधु-संत का व्यवहार

हिंदू धर्म में साधु-संतों व संन्यासियों का विशेष आदर किया जाता है। हमारे ग्रंथों में साधु-संतों व संन्यासियों के आचरण संबंधी कई विशेष बातें बताई गई हैं, आज हम आपको ऐसी ही कुछ बातें बता रहे हैं। महाभारत में ये बातें भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताई थी। ये बातें जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-


1. किसी भी जीव चाहे वह इंसान हो या कोई जंतु, उसे कष्ट न पहुंचाएं। किसी भी स्थान पर अधिक समय न रुकें।
2. कभी किसी के साथ शत्रुता न करें। अगर कोई मजाक उड़ाए या कष्ट भी दे तो भी क्रोध न करें, मधुर व्यवहार ही करें।
3. संत को अपनी इंद्रियों (जीभ, आंखें, कान, नाक आदि) पर पूरी तरह से नियंत्रण होना चाहिए।
4. संत को गृहस्थ (घर-परिवार वाले) और वानप्रस्थों (वन में रहने वाले) के साथ संपर्क में नहीं रहना चाहिए।
5. संत को किसी के बारे में बुरा नहीं बोलना, सोचना या करना चाहिए। कभी स्वयं की प्रशंसा नहीं करनी चाहिए।
6. सूनी कुटी, वृक्ष के नीचे, वन में अथवा गुफा में अज्ञात रूप से रहकर भगवान का ध्यान करना चाहिए।
7. लौकिक सुख जैसे धन-संपत्ति, वाहन सुख या अन्य संसाधनों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
8. जो मिले उसी में तृप्त और संतुष्ट रहें। प्रणव अक्षर (ऊं ) आदि मंत्रों का जाप करते रहना चाहिए।
9. किसी भी वस्तु की इच्छा नहीं करना चाहिए। सभी के साथ समान रूप से व्यवहार करना चाहिए।
10. संत को वाणी, मन, क्रोध, हिंसा व भूख को वश में रखना चाहिए। निंदा या प्रशंसा दोनों में समान भाव रखना चाहिए।

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Web Title: mhaabharat se jaanie, kaisaa honaa chaahie saadhu-snt ka vyvhaar
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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