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द्रौपदी ने खुद बताया था इन 10 कामों से खुश रखती थी पांचों पांडवों को

परिवार में सुख और शांति बनी रहे इसके लिए महाभारत में द्रौपदी ने सत्यभामा को खास तरीके बताए थे।

यूटिलिटी डेस्क | Last Modified - Feb 22, 2018, 04:48 PM IST

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    परिवार में सुख और शांति बनी रहे इसके लिए महाभारत में द्रौपदी ने सत्यभामा को खास तरीके बताए थे। सत्यभामा श्रीकृष्ण की पटरानी थीं। द्रौपदी ने सत्यभामा को बताया था कि वह किस प्रकार पांचों पांडवों को हमेशा प्रसन्न रखती है। ये प्रसंग संक्षिप्त महाभारत के प्रथम खंड में दिया गया है। इस खंड के वन पर्व में द्रौपदी ने सत्यभामा को अपने दैनिक जीवन से जुड़ी बातें बताई हैं। यहां जानिए द्रौपदी और सत्यभामा के संवाद के कुछ खास अंश…

    1.द्रौपदी सत्यभामा से कहती हैं कि कभी भी पति को वश में करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कुछ स्त्रियां पति को वश में करने के लिए तंत्र-मंत्र, औषधि आदि का उपयोग करती हैं, जो कि नहीं करना चाहिए। ऐसा करने पर यदि पति को ये बात मालूम हो जाती है तो वैवाहिक रिश्ता बिगड़ सकता है। मैं इस बात का हमेशा ध्यान रखती हूं।

    2.स्त्री को कभी भी ऐसी कोई बात नहीं कहनी चाहिए, जिससे घर-परिवार में किसी का अपमान होता है। जो समझदार स्त्री होती है, वह अपने परिवार के सभी रिश्तों की पूरी जानकारी रखती है, क्योंकि एक भी रिश्ता चूक गए तो वह रिश्ता अपमानित हो सकता है। हर एक रिश्ते की जानकारी रखना चाहिए जो कई पीढ़ियों से चले आ रहे हैं। द्रौपदी कहती हैं कि मैं अपने पांडव परिवार के एक-एक रिश्ते से परिचित हूं। सबसे पहले मैंने इसका अध्ययन किया।

    3.सुखी वैवाहिक जीवन के लिए स्त्री को बुरे चरित्र वाली स्त्रियों से दूर ही रहना चाहिए। गलत आचरण वाली स्त्रियों से मित्रता या मेल-जोल होने पर जीवन में परेशानियां बढ़ जाती हैं। इसीलिए मैं ऐसी स्त्रियों की संगत नहीं करती हूं।

    4.किसी भी काम के लिए आलस्य नहीं करना चाहिए। जो भी काम हो, उसे बिना समय गवाए पूरा कर लेना चाहिए। ऐसा करने पर पति और पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है।

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    5.स्त्री को कभी भी अकारण क्रोध नहीं करना चाहिए, हमेशा क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए। पराए लोगों से व्यर्थ बात करना भी अच्छा नहीं होता है।

    6.द्रौपदी ने सत्यभामा से कहा कि वह कभी भी परिवार में किसी सदस्य की बुराई भी नहीं करती है। हमेशा सभी के सुख का ध्यान रखती है।

    7.द्रौपदी ने बताया कि वह अपनी सास यानी कुंती द्वारा बताए गए सभी नियमों का करती है।

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    8.रोज घर आए गरीबों को दान देना, पूजा करना, श्राद्ध करना, त्योहारों पर विशेष पकवान बनाकर पांडवों को प्रसन्न रखती हूं।

    9.द्रौपदी ने कहा कि वह माता की कुंती की सेवा में लगी रहती है। माता की सेवा से पांडव प्रसन्न रहते हैं।

    10.द्रौपदी ने बताया कि वह पांडवों की आमदनी और व्यय की पूरी जानकारी हमेशा रखती है।

    इन सारी बातों का ध्यान रखने से ही पांचों पांडव द्रौपदी से हमेशा प्रसन्न रहते थे।

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